राजबाला पर घिरती रघुवर सरकार

मुख्यसचिव राजबाला वर्मा के चारा घोटाला में नाम आने की वजह से सरकार पूरी तरह से घिरती जा रही है। एक के बाद एक नए खुलासे से सरकार के निर्णय पर ही सवाल उठते जा रहे हैं। ताजा मामला सरकार के मंत्री सरयू राय की प्रकाशित किताब में राजबाला वर्मा और लालू यादव से जुड़े एक प्रकरण का है जिसमें बताया गया है कि 1996 में लालू की गिफ्तारी के बाद तत्कालीन पटना डीएम राजबाला वर्मा फूट-फूटकर रोयी थीं।

मंत्री सरयू राय के ये खुलासे झारखंड की रघुवर सरकार को असहज कर रहे हैं। पार्टी के अंदर खाने इस बात को लेकर बहस गरम हो गई है कि आखिर जब राजबाला, राजद सुप्रीमो लालू यादव के साथ इस प्रकार चारा घोटाले में जुड़ी थीं, तो राज्य में उन्हें मुख्यसचिव जैसे पद पर क्यों आसीन कराया गया। सीएस बनाने के पूर्व इसकी जांच क्यों नहीं की गई। क्यों जानबूझकर सरकार की छवि को धक्का पहुंचाया गया।

जाहिर है, मुख्यसचिव राजबाला वर्मा को भेजे गए रिमांडर को लगातार अनसुना कर देना एक तरह से सिस्टम के कायदे-कानून की खुली अवहेलना करना है। इसलिए धीरे-धीरे राजनीतिक गलियारों में भी इसे लेकर प्रतिक्रिया जारी है। जेएमएम, कांग्रेस ने आगामी बजट सत्र में इसे मुद्दा बनाने की बात कह दी है। कुल मिलाकर सरकार एक बार फिर अपने फैसले के कारण विपक्ष के निशाने पर होगी और उसके पास बचाव के लिए बहुत पुख्ता वजह भी नहीं होगा।

कल पढ़िएः तत्कालीन पटना डीएम राजबाला वर्मा पुलिस अधिकारियों समेत पूरे प्रशासनिक महकमे से किस प्रकार पेश आईं थी। और लालू को बचाने की पूरी जद्दोजदह की थी।

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