रघुवर सरकार की नीतियां गरीब विरोधीः बाबूलाल

झाविमो प्रमुख बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि भू-राजस्व विभाग एक ऐसा कानून लाने जा रहा है, जिससे जमीन संबंधी मामले में अब किसी भी पदाधिकारी या कर्मी पर कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। बल्कि उन पर अगर इस प्रकार का केस यदि दर्ज भी होगा तो वह भी खत्म कर दिया जाएगा।

उन्होंने इस पर आगे कहा कि कानून में प्रावधान है कि जमीन संबंधी सरकार के कर्मचारी कोई गड़बड़ी करेंगे तो उन पर सरकार कोई कार्रवाई नहीं करेगी। इससे साफ स्‍पष्‍ट है कि सरकार की मंशा क्‍या है। लगता है रघुवर दास की सरकार जमीन लूटने और किसानों को भूमिहीन करने के लिए बनी है। पहले तो इस सरकार ने सीएनटी/एसपीटी एक्‍ट में संशोधन करने का प्रयास किया। जब असफल हुए तो, उन्‍होंने किसान के जमीन सुरक्षा के प्रावधानों को खत्‍म कर दिया। वर्षों से गैरमजरुआ जमीन पर जो गरीब बसे हुए थे, उस जमीन की जमाबंदी रद्द करने के बाद भूमि बैंक में ट्रांसफर करके कॉरपोरेट घरानों को देने की तैयारी में है।

अब इस कानून को लाकर यह सरकार कुछ बिल्‍डर और सरकारी कर्मचारी के साथ मिलकर गरीबों की जमीन लूटने का काम करेगी और आरोपी पर कार्रवाई भी नहीं होगी। इससे बड़ा मजाक और क्‍या होगा। हमारी पार्टी इस प्रकार के कानून का विरोध करेगी। सरकार को यह करना चाहिए था कि जिन अधिकारियों और बिल्‍डरों ने मिलकर गलत तरीके से गरीबों की जमीन लूटी है उनके खिलाफ कठोर सजा देना चाहिए। लेकिन सजा देने के बजाय सजा के प्रावधानों को ही खत्‍म कर दिया जा रहा है और दोषी लोगों को बचाया जा रहा है।

बता दें कि कहा जा रहा है कि झारखंड भू-राजस्व विभाग एक ऐसा कानून लाने जा रहा है, जिससे जमीन संबंधी मामले में अब किसी भी पदाधिकारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। इस कानून के आ जाने से अधिकारियों और कर्मियों पर चल रहे पुराने मामले भी खुद-ब-खुद खत्म हो जाएंगे। कानून की ड्राफ्टिंग हो चुकी है। भू-राजस्व विभाग जल्द ही इसे कैबिनेट में लाएगा। जहां से पास होने के बाद इसे विधानसभा में रखा जाएगा। विधानसभा से पास होते ही अधिसूचना कानून का शक्ल ले लेगी। इस कानून के लागू होते ही भूमि घोटाला, आदिवासियों की जमीन का गलत हस्तांतरण करने वाले अफसरों पर चल रही विभागीय कार्यवार्इ खत्म हो जाएगी।

लेकिन सरकार की मामले पर कुछ और ही दलील है। सरकार का कहना है कि इस कानून के आने से जमीन संबंधी काम जल्दी हो पाएगा। अधिकारियों और कर्मियों के मन से केस होने का और विभागीय कार्यवाई होने का डर खत्म हो जाएगा। इस एक्ट को एक ज्युडीशियल प्रोटेक्शन एक्ट की तर्ज पर बनाया जा रहा है। लेकिन सरकार के इस कानून से विपक्ष खुश नहीं है। सभी पार्टियां इस कानून को जमीन लूट का जरिया बता रही हैं। उनका कहना है कि रघुवर सरकार के आने के बाद से ही सरकार जमीन लूटने के लिए काम कर रही है। चाहे वो लैंड बैंक का मामला हो, सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन करने की कोशिश हो या मोमेंटम झारखंड के जरिए छोटी-छोटी कंपनियों को जमीन देने का मामला हो।

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