किसे लगी है ज्यादा मिर्ची!

झारखंड विधानसभा में जो हुआ उसे पूरे देश ने देखा. प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि झामुमो को मिर्ची लग रही है. आखिर किसे लगी है मिर्ची और क्यों! रघुवर दास आक्रामक अंदाज में अपनी सफलता की कहानियां कह रहे थे. अब विपक्ष का काम सरकारी कहानियां सुनने का तो है नहीं, तो विपक्ष ने विरोध किया जो उचित भी था.

सरकार ने मोमेंटम झारखंड कराया. इसकी सफलता के बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन कई कागजी कंपनियों की वजह से ऐसे दावों की पोल खुल गई. विपक्ष ने ऐसे कई पोल खोले, इसकी वजह से सरकारी अफसरों को मिर्ची लगती रही. अब सरकारी अफसर तो कुछ बोल नहीं सकते, तो जवाब देने का मोर्चा मुख्यमंत्री ने खुद संभाल लिया और विपक्ष से उलझ गए.

कई राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अहंकार की सत्ता पर काबिज झारखंड के मुख्यमंत्री को विरोध बिल्कुल पसंद नहीं है. यह राजनीति के मूल सिद्धांत के खिलाफ है. सरकारी काम करती है, गलतियां करती है और विपक्ष इन गलतियों को सामने लाता है. यही झारखंड में भी हो रहा है.

जमीन के, खदान के ऐसे कई मसले हैं, जिस पर खुद सरकार के मंत्रियों ने सवाल खड़े किए हैं. तो फिर एक लोकतांत्रिक सरकार को इतनी मिर्ची क्यों लग रही है. यह तो लोकतंत्र नहीं है. तो क्या रघुवर दास अपने को झारखंड से ऊपर समझने लगे हैं. दल से ऊपर समझने लगे हैं. उनके व्यवहार को देखकर तो ऐसा ही लगता है. इस तरह तो अच्छा काम करके भी भाजपा सरकार आम लोगों की नजर में विलेन बन जाएगी. धीरे-धीरे ऐसा हो भी रहा है. यह चेतने का समय है, आत्ममंथन का समय है. मुख्यमंत्री के लिए भी और उनकी पार्टी के लिए भी.

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