पूजा खत्म, झारखंड में सियासत तेज़

विजयादशमी और रावण दहन के बाद झारखंड में सियासी गतिविधियां एकबार फिर परवान चढ़ती दिख रही हैं. 17 अक्टूबर को प्रधानमंत्री के झारखंड आने की सूचना से एकबारगी जैसे कुछ दिनों से शांत पड़ी झारखंड की सियासत में उबाल आ गया है. अब एक बार फिर राजनीतिक पार्टियां चुनावी चुनावी रण में कूद पड़ी हैं। गुरुवार से भाजपा, जदयू, झामुमो, झाविमो और कांग्रेस अपनी तैयारियों पैना करने के लिए एक बार फिर मैदान में होगी। सत्‍तारुढ़ पार्टी भाजपा के चुनावी रणनीतिकार और विधानसभा चुनाव के सह प्रभारी नंदकिशोर यादव बुधवार को रांची पहुंच गए हैं। पूर्व मुख्‍यमंत्री हेमंत सोरेन भी बदलाव यात्रा को आगे बढ़ाने में जुटे हैं। पूर्व मुख्‍यमंत्री बाबूलाल मरांडी भी कई जिलों में जनादेश समागम के जरिये वोटरों में पैठ बढ़ाने में जी-जान से लगेंगे। विधानसभा चुनाव की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे झारखंड में जल्‍द ही एक बार फिर सियासी महारथी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दस्‍तक होने वाली है। पीएम मोदी इस बार दो दिवसीय झारखंड प्रवास पर 17 अक्टूबर को रांची पहुंचेंगे। वे 17 अक्टूबर को पलामू और संताल परगना में जनसभा को संबोधित करेंगे।

मोदी ने संथाल और पलामू को ही क्यों चुना ! इसे लेकर भी विश्लेषक अलग अलग राय रख रहे हैं. कुछ लोगों का मानना है कि अभी भी संथाल को लेकर भाजपा पूरी तरह आश्वस्त नहीं है, इसलिए संथाल में मोदी का कार्यक्रम रखा जा रहा है.

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