…लेकिन जनता की अदालत लालू पर करेगी आखिरी फैसला

लालू पर सजा-ए-एलान 3 जनवरी को होगा लेकिन सियासत के जानकार कहते हैं कि राजनीतिज्ञों को असली सजा तो जनता की अदालत देती है. ऐसे में अब सबकी जुबान पर एक ही सवाल है कि क्या लालू का समर्थक वर्ग इस बार सजा के बाद और ज्यादा गोलबंद होगा या लालू की राजनीति हासिये पर चली जाएगी! यही यक्ष प्रश्न है, जो विपक्ष के नेताओं को परेशान कर रहा है.

बहुचर्चित चारा घोटाला मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह ने  दोषी करार दिया है. सजा पर तीन जनवरी को फैसला आयेगा. अदालत के आदेश पर लालू को हिरासत में ले लिया गया है. वहीं इस मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र समेत सात आरोपियों को कोर्ट ने बरी कर दिया है. 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाले में जुड़े देवघर कोषागार से 89 लाख 27 हजार रुपये की अवैध निकासी के मामले में ये फैसला कोर्ट ने सुनाया.

देश में इन दिनों एक के बाद एक कई घोटालों पर कोर्ट के फैसलों से सियासी माहौल बदल गया है. 2जी घोटाला, आदर्श घोटाला इसके बाद लालू यादव का चारा घोटाला. इन फैसलों से देश की सियासत बदल सकती है. जहां तक बिहार की राजनीति में लालू की हैसियत का सवाल है, इन दिनों बालू को लेकर मचे बवाल से जानी जा सकती है. बिहार की राजनीति पर करीब से नजर रखने वालों की मानें तो बालू के मुद्दे पर राजद को भारी जनसमर्थन मिला है. और देखा जाय तो बालू ने लालू की राजनीतिक जमीन को ज्यादा मजबूत किया है।

जानकारों की मानें तो महागठबंधन से अलग होने के बाद लालू ने अपनी राजनीतिक हैसियत में दिन रात इजाफा किया है, वे एक बार फिर पिछड़ों और गरीबों के नेता के रूप में मजबूती से उभरे हैं. ये उऩकी दशकों पहले वाली राजनीतिक छवि को गाढ़ा कर रहा है.

इसलिए लालू की सजा अगर हो भी गई तो राजद को बिखरते हुए देखने की मंशा पाले विपक्ष को करारा झटका लगेगा. वैसे भी तेजस्वी यादव ने लालू यादव के जुझारूपन को अपने भाषणों और बिहार विधानसभा में दिए बयान के माध्यम से दिखा दिया है. जानकारों की मानें तो लालू की तरह तेजस्वी भी सड़क पर उतर कर राजनीति करने में विश्वास करते हैं, जिसकी झलक दिखने लगी है.

विपक्ष भले ही इस ताक में बैठा है कि लालू की सजा होते ही पार्टी के बाकी नेताओं पर हमला कर उन्हें बिहार की राजनीति से दरकिनार कर दिया जाएगा. लालू के बेटे तेजस्वी, तेजप्रताप, राबड़ी, मीसा सभी जांच के घेरे में हैं. इस स्थिति में भ्रष्टाचार पर लालू परिवार को घेरा जा सकता है. लेकिन यह देखना भी जरूरी है कि लालू यादव और उनके परिवार पर हो रहे जांच के बावजूद बिहार में राजद का बिहार में जनसमर्थन बढ़ा है और राजद एनडीए के खिलाफ ज्यादा हमलावर मोड में आ गई है.

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