क्या भ्रष्ट तरीके से चुनी जाएगी शहर की सरकार !

झारखंड में नगर निगम, नगर परिषद के चुनाव हो रहे हैं. उम्मीदवार मैदान में हैं. इस बार दलीय आधार पर चुनाव हो रहे हैं, इसलिए सभी दलों ने जीतने वाले धनपतियों पर दांव आजमाया है. अंधाधुंध पैसा इन चुनावों में बहाया जा रहा है. बिल्कुल विधानसभा के पैटर्न पर, उम्मीदवार वोटरों को पैसे का प्रलोभन दे रहे हैं. कोई जात की खेमेबाजी कर रहा है, कोई धर्म के नाम पर नारे लगवा रहा है. हर तरह के वोटों के ठेकेदार बाजार में घूम रहे हैं.

किसी भी तरह जीतना है, नगर की सरकार पर काबिज होना है. इसी खेल के चलते भ्रष्टाचार और वोटरों को लुभाने के तमाम तिकड़म किए जा रहे हैं. तो क्या ऐसे तिकड़मों से मिली जीत किसी नगर की सरकार को विश्वसनीय बने रहने देगी, जो वार्ड सदस्य, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष जीतेंगे लाखों लाख खर्च करके वह आगे क्या करेंगे यह आसानी से समझा जा सकता है. पूरा नगर निगम या नगर परिषद भ्रष्टाचार का नया अड्डा हो जाएगा. जिस तरह पंचायतों में मुखिया नए धनपति बनकर उभरे हैं. विकास योजनाओं के कमीशन से उनके घर भर रहे हैं. उसी तरह नगर में भी कई दर्जन नए कमीशन एजेंट खड़े हो जाएंगे. इस चुनाव में हो रहा भ्रष्टाचार कई यक्ष प्रश्न खड़े करता है. राज्य चुनाव आयोग की मशीनरी सब कुछ देख कर भी इसे अनदेखा कर रही है. जिला प्रशासन हर रोज प्रेस विज्ञप्ति जारी कर रहा है लेकिन उनकी नाक के नीचे आचार संहिता की धज्जियां उड़ाई जा रही है. हर जिले, हर कस्बे में खुलेआम वोटर खरीदे बेचे जा रहे हैं. पर कहां है कोई देखने वाला. बड़े दल अपने उम्मीदवारों के जरिए क्षेत्र पर अपनी पकड़ आजमा रहे हैं. उनके बड़े नेता तकरीर कर रहे हैं वोटर बेचारा चुप है. वह 16 अप्रैल को अपना वोट डालेगा लेकिन वोट करें भी तो क्या करें. दागी अपराधी बाहुबली सेठ जी ठेकेदार यही तो है उनके सामने विकल्प. इन्हीं में से किसी को चुनना है.

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