OBC आरक्षण और स्थानीय नीति पर हो रही गोलबंदी

मनोज कुमार सिंह
बजट सत्र के दौरान अचानक झारखंड की राजनीति में तेजी से घटनाक्रम बदले। ओबीसी आरक्षण और स्थानीय नीति को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के प्रतिनिधियों में अचानक हलचल होने लगी है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि धीरे-धीरे बड़े आंदोलन का स्वरूप तैयार हो रहा है। राज्य के विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा अपने हक की लड़ाई को लेकर लगातार आंदोलन हो रहे हैं, समाज के भीतर उठने वाले तूफान को जनप्रतिनिधियों ने समझ लिया है। यही कारण है कि बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष के लगभग 25-26 विधायकों ने स्थानीय नीति एवं नियोजन को लेकर सरकार को पत्र लिखा है। माननीय विधायकों द्वारा यह पत्र ऐसे समय में लिखा गया जब समाज के अंदर से ऐसे ज्वलंत मुद्दों पर आवाज उठने लगी है। ऐसे नेतागण अपनी खिसकती हुई जमीन को बचाने के लिए मजबूरी में सरकार को पत्र लिख रहे हैं अन्यथा सरकार के 3 वर्ष गुजर जाने के बाद इन मुद्दों को क्यों उठाया जा रहा है, यह सोचने का विषय है। सरकार की गंभीरता एवं उसके कार्य शैली पर मंत्रियों एवं विधायकों के द्वारा प्रश्न चिन्ह उठाए जा रहे हैं, लोकतंत्र की मर्यादा की दुहाई दी जा रही है, इसे क्या समझा जाए?

झारखंड की राजनीति को करीब से समझने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि संगठन, सरकार और विपक्ष के बीच जनता के मुद्दे को लेकर एकमत नहीं बन पा रहा है। एक बड़ी खाई सी दिखती है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि ऐसी स्थिति बनने के पीछे मुख्यमंत्री का अड़ियल रवैया एवं अपने कैबिनेट के बीच संवादहीनता सबसे बड़ा कारण है। सदन के भीतर जनसमस्याओं को लेकर सरकार समुचित जवाब देने में यदि असफल होगी तो अनेक प्रकार के सवाल खड़े हो सकते हैं, और हो भी रहे हैं। सत्ता पक्ष का कोई भी विधायक अपने क्षेत्र की गंभीर समस्या को उठा पाने में अपने को असहज महसूस कर रहा है और अपने क्षेत्र की जनता के साथ न्याय ना करने के कारण अंदर ही अंदर कुंठित महसूस कर रहा है। यह एक विकट स्थिति है। अब ऐसा लगने लगा है कि पिछड़ी जाति के सभी विधायक चाहे वह किसी भी दल में हो अपने हक की लड़ाई के लिए गोल बंद हो रहे हैं। अंदरखाने में यह भी चर्चा है कि कहीं ऐसा ना हो यह गोलबंदी एक बहुत बड़े आंदोलन का स्वरूप ले ले और झारखंड में एक नई राजनीति की पहल होने लगे। कौन होगा इस आंदोलन का चैंपियन! यह तो कहना थोड़ा जल्दी हो सकता है, लेकिन इस मुद्दे पर आगामी चुनाव में किसी ना किसी को तो चैंपियन की भूमिका में आना ही पड़ेगा!

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *