पानी–पानी पॉलिटिक्स

राकेश कुमार

बिहार में सियासत गर्म है पर पूरा प्रदेश बाढ़ में डूबा हुआ है। लोग बेघर हो गए हैं। स्कूल, कॉलेज बंद हैं। खाने पर भी आफत आ गई है। वहीं प्रदेश के नेता एक दूसरे पर कीचड़ उछालने में मशगुल हैं और जनता इस त्रासदी को झेलने के लिए विवश है। पूर्वी चंपारण जिले में बाढ़ का कहर बढ़ता ही जा रहा है। शुक्रवार को बाढ़ का पानी जिले के अन्य 20 प्रखंडों में फैल चुका है। बाढ़ की स्थिति को लेकर जिला प्रशासन ने जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की, जिसमें केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने भी भाग लिया। मौके पर सूबे के पर्यटन मंत्री प्रमोद कुमार भी मौजूद थे। बैठक में यह बात सामने आई कि जिले में बाढ़ की स्थिति काफी भयावह है।

बाढ़ को लेकर राज्य सरकार की ओर से विशेष जिलाधिकारी बना कर भेजे गये परिवहन आयुक्त सह पूर्व जिलाधिकारी अनुपम कुमार ने बताया कि सेना की दो टीम बाढ़ सहायता कार्य में लगी है वहीं एनडीआरएफ की तीन टीम कार्य कर रही है। सुगौली एवं बंजरिया में बाढ़ की स्थिति काफी भयावह है। ऐसी ही स्थिति मोतिहारी सदर प्रखंड के पूर्वोत्तर क्षेत्र में है। ढाका, चिरैया, रक्सौल, पताही, आदापुर, बनकटवा आदि क्षेत्रों में स्थिति सामान्य हो रही है। सुगौली में हेलिकॉप्टर की मदद से लोगों को सहायता मुहैया कराई गई है। बैठक में सांसद डा. संजय कुमार जायसवाल, रमा देवी, विधायक राजेंद्र राम, श्यामबाबू यादव, डा. शमीम अहमद, रामचंद्र सहनी, विधान पार्षद सतीश कुमार, राजेश कुमार उर्फ बबलू गुप्ता, डीडीसी सुनील कुमार यादव के अलावा सभी विभागों के अधिकारी मौजूद थे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जिले में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए अविलंब राहत एवं बचाव के सभी उपाय किए जाएं।

50 हजार लोगों तक पहुंचाया गया राहत सामग्री
डीएम रमण कुमार ने बताया कि जिले के 50 हजार लोगों तक राहत के पैकेट पहुंचाए जा चुके हैं। शेष लोगों तक इसे पहुंचाने का कार्य जारी है। पानी से घिरे लोगों तक सूखा भोजन पहुंचाया जा रहा है। एनडीआरएफ की टीम इस कार्य में लगी हुई है। इन्हें चूड़ा के पैकेट में अब एक किलो चना, गुड़ भी दिया जा रहा है। वहीं जहां पानी कम हुआ है वहां लोगों को भोजन बनाने के लिए पांच किलो चावल, एक किलो दाल, दो किलो आलू, एक किलो नमक, हल्दी का पैकेट एवं दवा की कीट दी जा रही है। ताकि वायरल फीवर होने पर लोग खुद को स्वस्थ्य रख सकें। उन्होंने कहा कि जहां पानी उतर चुका है उन क्षेत्रों में 130 सामुदायिक रसोईघर के माध्यम से लोगों को तैयार भोजन कराया जा रहा है। इसकी संख्या पानी हटते ही अन्य जगहों पर बढ़ाई जाएगी।

सड़क, पेयजल एवं बिजली की व्यवस्था होगी दुरूस्त
डीएम ने कहा कि जहां पानी उतर चुका है उन क्षेत्रों में पीएचईडी विभाग को कहा गया है कि वह अविलंब ठप पड़े चापाकलों को ठीक करे और लोगों के लिए शुद्ध जल उपलब्ध कराए। पशुओं के लिए चारा एवं दवा की व्यवस्था करने के लिए पशुपालन विभाग को निर्देश दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग को कहा गया है कि वह जहां पानी हट चुका है वहां अविलंब ब्लीचिंग पाउडर की छिड़काव कराए और लोगों को पानी साफ करने के लिए क्लोरीन एवं हैलोजन टैबलेट मुहैया कराए। राजमार्ग, आरसीडी, ग्रामीण कार्य विभाग को कहा गया है कि जिन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पानी हट चुका है वहां की क्षतिग्रस सड़कों को अविलंब मोटरेबल बनायी जाय ताकि पीड़ित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचायी जा सके। डीएम ने कहा कि बिजली विभाग को निर्देश दिया गया है कि जिन क्षेत्रों में पानी निकल चुका है वहां की व्यवस्था ठीक करें।

पदाधिकारियों को सौंपी गई जिम्मेवारी
जिलाधिकारी ने बताया कि जिला से लेकर प्रखंड स्तर तक के सभी पदाधिकारियों की बाढ़ को लेकर जिम्मेवारी तय कर दी गई है। इसमें हर पदाधिकारी को अपने कार्य की प्रतिदिन रिपोर्ट देनी है।

होगी जनप्रतिनिधयों की बैठक
रमण कुमार ने बताया कि बाढ़ आपदा को लेकर प्रखंड स्तर पर भी जनप्रतिनिधियों की बैठक होगी, जिसमें पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधि भी भाग लेंगे। जनप्रतिनिधियों से बाढ़ को लेकर जानकारी ली जाएगी।

बाढ पीड़ितों की सूची का अनुश्रवण समिति करेगा अनुमोदन
जिलाधिकारी ने बताया कि सभी 20 प्रखंडों के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की सूची सरकारी कर्मचारियों के माध्यम से बनाया जाएगा एवं इसके बाद वरीय पदाधिकारी इस सूची के 10 प्रतिशत लाभार्थियों का भौतिक सत्यापन करेंगे। इसके बाद पंचायतस्तरीय अनुश्रवण समिति सूची को अनुमोदित करेगी। इसमें किसी प्रकार की गड़बड़ी होने पर अनुश्रवण समिति के सभी सदस्यों एवं संबंधित कर्मचारियों पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। बाढ़ सहायता की नकद राशि सीधे लाभार्थियों के खाते में जाएगी। इसके लिए बैंकों को भी निर्देश दिया जा चुका है।

सामाजिक संगठनों से ली जायेगी मदद
बाढ़ पीड़ितों को जो सामाजिक संगठन मदद करना चाहते हैं उनकी बैठक शनिवार को बुलायी गई है। इसमें निबंधित संगठनों की मदद ली जाएगी। संगठनों को सुनिश्चित करना होगा कि वे पीड़ितों के लिए स्वस्थ्य एवं सुरक्षित भोजन का वितरण करेंगे।

असावधानी और सेल्फी से बढ़ रहा मौत का आंकड़ा
डीएम ने बताया कि जिले में ज्यादातर मौतें अभिभावकों की लापरवाही से छोटे बच्चों की हुई जो बाढ़ के पानी में स्नाने करने के चक्कर में गहरे पानी में चले जा रहे हैं। इसलिए बच्चों पर कड़ी नजर रखी जाय और उन्हें बाढ़ के पानी में नहीं जाने दिया जाय। दूसरी ओर अति उत्साहित कई नवजवानों की मौत सेल्फी लेने एवं धारा को पार कर दिखाने के चक्कर में हुई है।

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