सरयू राय की वज़ह से कट गया अमित खरे का पत्ता !

झारखण्ड भाजपा की आंतरिक राजनीति की वज़ह से ईमानदार और काबिल आईएएस अधिकारी अमित खरे मुख्य सचिव नहीं बन पाए. चारा घोटाले का उदभेदन करनेवाले इस तेज़ तर्रार अधिकारी की राज्य को जरुरत थी. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अगला मुख्य सचिव बनाने की बात कहकर तब रोका भी था, जब वो केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली जानेवाले थे. तो आखिर ऐसा क्या हो गया कि अमित खरे का नाम आखिरी क्षणों में काट दिया गया और उनकी जगह स्वास्थ्य विभाग में अपर मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी झारखण्ड के मुख्य सचिव बना दिए गए. इसी कड़ी में निधि खरे को भी कार्मिक से हटाकर स्वास्थ्य में भेज दिया गया. अब वो भी दिल्ली का रुख जल्द ही करेंगी.

राज्य के कुछ वरिष्ठ अफसर कहते हैं कि दो वजहों से मुख्यमंत्री ने अंतिम क्षणों में अपना मन बदला. एक तो उन्हें पूर्व मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने कन्विंस किया कि अमित खरे उनकी इच्छानुसार नहीं चलेंगे. अपने मन की करेंगे. अपनी बातों के प्रमाण में राजबाला ने मुख्यमंत्री को खरे के कई वैसे आदेश गिनाये, जिनमे उन्होंने मुख्यमंत्री के संकेत को नज़रंदाज़ किया. राजबाला ने बेहद चतुराई से मुख्यमंत्री को कन्विंस किया. यह हाफ ट्रुथ था. मुख्यमंत्री बाद में किसी झमेले में ना पड़ जाएँ, इसलिए अमित खरे ने थोड़ी लम्बी कागज़ी कार्रवाई की. पर इसकी गलत व्याख्या की गयी.

फिर राजबाला ने मुख्यमंत्री को अमित खरे और सरयू राय के आपसी संबंधों के बारे में बताया. मुख्यमंत्री को उन्होंने समझाया कि चारा घोटाले के वक़्त से ही दोनों के मधुर सम्बन्ध रहे हैं. सरयू राय चारा घोटाले के याचिकाकर्ताओं में रहे हैं. फिर सीएम को बताया गया कि हाल के दिनों में सरयू राय ने जितने भी लेटर बम फोड़े हैं. वो उन्हें अमित खरे के जरिये ही मिलते रहे हैं. सीएम को यह भी बताया गया कि मुख्य सचिव के रूप में अमित खरे और सरयू राय की जोड़ी उनके लिए खतरे का सबब बन सकती है.

बस यही टर्निंग पॉइंट था. फिर सवाल उठा कि अमित खरे नहीं तो कौन! केन्द्रीय प्रति नियुक्ति पर गए राजीव कुमार और उदय प्रताप सिंह ने झारखण्ड लौटने से मना कर दिया. सुखदेव सिंह को एक साज़िश के तहत चारा घोटाले में आरोपी बनाया गया. इंदुशेखर चतुर्वेदी अकादमिक किस्म के प्राणी कहे जाते हैं. अरुण कुमार सिंह और वाणिज्यकर विभाग के अपर मुख्यसचिव अग्रवाल अभी-अभी तो प्रमोट ही हुए थे. ऐसे में सुधीर त्रिपाठी पर मुख्यमंत्री की नज़र पड़ी. त्रिपाठी आज तक किसी विवाद में नहीं पड़े. समन्वय से काम करने के लिए जाने जाते हैं. ऐसे में त्रिपाठी के नाम पर किसी को कोई आपत्ति नहीं थी. सितम्बर में सुधीर त्रिपाठी रिटायर करेंगे, उम्मीद है कि अरुण कुमार सिंह को तब मौका मिल जाये.

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