भूमिहार वोटों पर निशाना, श्री बाबू का बहाना

-श्री कृष्ण सिंह की जयंती के बहाने अपनी राजनीति चमकाते दिखे सभी दल

बिहार केसरी श्रीकृष्ण सिंह सिंह की जयंती आज सभी दलों ने पटना में मनाया। खूब तडक-भड़क रहा।। पर श्री बाबू कहीं नहीं दिखे। ना ही उनके कृतित्व की चर्चा हुई। चर्चा हुई तो केवल राजनीति की। यह साबित करने की कोशिश ही होती रही कि श्री बाबू के बहाने कौन भूमिहार वोटों के कितने करीब जा सकता है। हम यहां तीन प्रमुख कार्यक्रमों की चर्चा करेंगे। इससे आपको पता चलेगा कि आखिर दिन भर पटना में हुआ क्या।

पहले आपको ले चलते हैं ज्ञान भवन के बापू सभागार। 17 साल से आयोजित हो रहे इस प्रोग्राम के पीछे थे कांग्रेस के कद्दावर भूमिहार नेता अखिलेश प्रसाद सिंह। बिहार प्रभारी डॉ सीपी जोशी तो कार्यक्रम से दूर रहे लेकिन डॉ मीरा कुमार, डॉ शकील अहमद, निखिल कुमार, सदानंद सिंह और कौकब कादरी यहां मौजूद थे। लेकिन मंच लूट ले गए मुख्य अतिथि लालू प्रसाद। लालू ने कहा कि नीतीश भाजपा के आगे दंडवत हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में कानून का राज़ ख़त्म हो गया है। रोज़ हत्या, बलात्कार हो रहे हैं। उन्होंने फरमाया कि उन्हें डराने की कोशिश हो रही है लेकिन जो डर गया, वो मर गया, इसलिए वो लड़ते रहेंगे। लालू ने कहा कि 15 लाख के चक्कर में पिछली बार नौजवानों ने मोदी को झांसे में आकर वोट दे दिया था। उन्होंने इस मंच के जरिये कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक चौधरी पर भी कटाक्ष किये।

 

अब चलिए श्रीबाबू जयंती पर आयोजित दूसरे बड़े कार्यक्रम में। राजधानी के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में मेघालय के राज्यपाल गंगा प्रसाद उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, रामकृपाल यादव आदि मौजूद थे। कार्यक्रम के पीछे थे हम नेता महाचंद्र सिंह । लेकिन इस कार्यक्रम में मगही में दिल की बातें कर पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने मंच लूट लिया। मांझी ने कहा कि श्रीबाबू भूमि सुधार करना चाहते थे। इससे जातिवाद ख़त्म होता जो अभी भी है। उन्होंने फिर उस सियासी झूठ को दोहराया कि उनके मुख्यमंत्री रहते, वो एक मंदिर गए थे, उनके जाने के बाद उस मंदिर को धोया गया था।

 

 

तीसरा महत्वपूर्ण कार्यक्रम सरकारी था। जिसमें हर साल बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्री बाबू की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने की परम्परा है। इसमें राज्यपाल सत्यपाल मलिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, विधानसभा अध्यक्ष और बड़े भूमिहार नेता विजय चौधरी, नन्दकिशोर यादव, श्याम रजक आदि थे। इस रस्मी कार्यक्रम में कोई भाषण नहीं।

अब आप ही सोचिये। इन कार्यक्रमों में श्री बाबू कहां थे! बिहार के पहले मुख्यमंत्री और विकास का पहला रोडमैप बनाने वाले श्रीबाबू के बहाने भूमिहार वोटों के जुगत की यह कोशिश क्या उचित है! यह सवाल आप पर ही छोड़ते हैं हम।

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