हूल दिवस पर झारखण्ड में सियासी शूल

हूल दिवस पर भी झारखण्ड में सियासी शूल शुरू हो गई है.सिदो-कान्हू के वंशज की हत्या मामले पर सत्ताधारी दल और विपक्ष में जबरदस्त राजनीति शुरू हो गई है. भाजपा इस मुद्दे को आने वाले दुमका और बेरमो उप चुनाव में भुनाने की फिराक में है.वहीँ सत्ताधारी दल इसे जल्द से जल्द मामले को समाप्त करने की फ़िराक में है. शहीद वंशज की हत्या हुए एक हफ्ता से भी अधिक समय होने को है. अबतक पुलिस हत्यारे को पकड़ नहीं पाई है. वहीँ सत्ताधारी दल इस मामले को लेकर भाजपा पर राजनीति का आरोप लगा रही है. हूल दिवस पर शहीद के गांव भोगनाडीह में सिदो-कान्हो के वंशज की हत्या पर मामला गर्म हो गया है.भाजपा इस मुद्दे को छोड़ना नहीं चाहती है.आदिवासी सीएम होने के बाद भी राज्य में आदिवासी की हत्या हो जाती है.वह भी शहीद परिवार की.इस मामले में भाजपा सरकार को घेरने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है. वहीं भाजपा विधायक दल ने नेता सह पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी सहित कई भाजपा नेताओं ने हत्या मामले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर सिदो-कान्हू की प्रतिमा के समक्ष मौन श्रद्धांजलि कार्यक्रम में बैठे। इससे पहले भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल शहीद के गांव साहिबगंज जिले भोगनाडीह गांव का दौरा कर परिजनों से मुलाकात भी किया है. वहीं बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झामुमो को इस मामले में राजनीति दीखता है.झामुमो पार्टी इस राज्य में आदिवासी के नाम पर राजनीति करती रही है.झारखण्ड के आदिवासियों का भला भाजपा के सिवा कोई भी सरकार नहीं कर सकती है.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ.रामेश्वर उरांव ने कहा कि सिदो- कान्हू के वंशज की हत्या मामले में भाजपा राजनीति कर रही है. उन्होंने कहा कि झारखंड में करीब 16 वर्षों तक भाजपा की सरकार रही।
इस दौरान आदिवासियों के विकास और उनके कल्याण के लिए सरकार ने कोई कदम नहीं उठाएं। झामुमो के प्रदेश प्रवक्ता बिनोद पाण्डेय ने कहा कि इस मामले में जो भी दोषी होंगे,सरकार उसे सजा दिलाएगी.
शहीद के वंशज की हत्या मामले को लेकर जो भी हो,इतना तो जरुर है कि भाजपा को बैठे-बिठाए हेमन्त सरकार को घेरने का एक मुद्दा मिल गया है. 

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