बिहार में मिशन 2019 की तैयारी में जुटे सियासी दल

मिशन 2019 को लेकर बिहार में सियासी गरमी बढ़ने लगी है। सभी राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने तरीके से छोटे राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों को लुभाने-मनाने की कवयाद में लग गई हैं। कहा जा रहा है कि आनेवाले 6 महीनों में ही आगामी चुनाव की रूपरेखा क्या होगी ये कुछ-कुछ सामने आने लगेगा। फिलहाल सूबे की सबसे बड़ी पार्टी राजद इस मुहिम में सबसे आगे चल रही है। वैसे सभी छोटे दलों से संपर्क साधा जा रहा है जिनके पास जातीय आधार है, या सामाजिक संगठनों के जरिए वोटबैंक पर असर डालने का माद्दा रखते हैं।

इसलिए, लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भले ही अभी एक साल से ज्यादा का वक्त है लेकिन राजद प्रमुख लालू यादव चारा घोटाले के मामलों में जेल जाने के बाद भी राजनीतिक पैंतरेबाजी शुरू कर दी है। राजद के नेता ने जहां अपने पुराने साथियों को फिर से अपनी ओर लाने के लिए सब्जबाग दिखाने शुरू कर दिए हैं, वहीं दूसरी ओर एनडीए में शामिल छोटे दल ‘दबाव की राजनीति’ के तहत बीजेपी को आंखें दिखा रहे हैं।

वैसे, इन सब के बीच राजनीति दल के नेता सीधे कुछ भी नहीं बोल रहे हैं लेकिन सभी बड़े दलों के नेताओं को अचानक छोटे दलों की याद आ गई है। ऐसे में वे छोटे दलों पर डोरे डालकर चुनावी मैदान के पहले उसे आजमा लेना चाह रहे हैं। कई जातीय संगठन भी अपनी ताकतें अभी से ही दिखाना शुरू कर दिया है। एनडीए में शामिल राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी (रालोसपा) के शिक्षा के मुद्दे को लेकर मानव कतार कार्यक्रम में राजद के नेताओं के शामिल होने के बाद बिहार में अटकलों का बाजार गरम हो गया। इस कार्यक्रम में भाग लेने पर राजद के नेता शिवानंद तिवारी तो कुछ खुलकर तो नहीं बोला लेकिन रालोसपा से उनकी नजदीकियों के मायने लगाए जा रहे हैं।

वहीं मानव कतार में शामिल हुए राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी दो दिन बाद ही बिहार पीपुल्स पार्टी के संस्थापक और पूर्व सांसद आनंद मोहन से मिलने सहरसा जेल पहुंच गए। राजद के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह भी सांसद और जन अधिकार पार्टी के प्रमुख पप्पू यादव को राजद का ही करीबी बता कर उनपर डोरे डालने की कोशिश की है।

इधर, जदयू के पूर्व अध्यक्ष शारद यादव भी राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद से रांची जेल में मिलकर बिहार की राजनीति को हवा दे दी है। पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के वरिष्ठ नेता वृषिण पटेल भी रांची जेल में लालू प्रसाद से मिलकर बिहार में नए समीकरण के संकेत दे चुके हैं। जदयू नेता उदय नारायण चौधरी ने भी रांची जाकर लालू का हालचाल लिया है। इधर, जीतन राम मांझी भी इशारों ही इशारों में अकेले चुनाव लड़ने की बात भी कह चुके हैं।

उल्लेखनीय है कि पप्पू यादव राजद के की टिकट पर ही पिछली बार लोकसभा चुनाव जीते थे, और फिर उन्होंने अपनी अलग पार्टी बना ली। वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद डॉ अशोक चौधरी जदयू के पक्ष में लगातार बयानबाजी कर रहे हैं।

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