सियासत से दूर खेती कर रहे पूर्व सीएम मधु कोड़ा !

झारखंड के कई सियासी सूरमा कभी राजनीति के सूर्य थे, चमकते थे, उनके आस-पास प्रशंसकों की भीड़ थी। पर आज कोई नहीं जानता कि वह कहां हैं! किस हाल में हैं! यही राजनीति है। ऐसे में राजनीति गुरु ने ऐसे गुमनाम सियासी सूरमाओं की वर्तमान स्थिति को खंगालने की कोशिश की है। आप भी ऐसे लोगों के बारे में जानिये...और यह भी जानिये कि ऐसा क्यों हुआ!

झारखंड की राजनीति में एक ऐसा शख्स है जिसका नाम आने वाली कई दशकों तक लिया जाएगा। ये हैं झारखंड के निर्दलीय मुख्यमंत्री मधु कोड़ा। राज्य के पांचवें मुख्यमंत्री के रूप में मधु कोड़ा ने 18 सितंबर 2006 को शपथ ली थी। राज्य के मुख्यमंत्री बनने से पहले वे निर्दलीय विधायक थे। मधु कोड़ा का जन्म 6 जनवरी, 1971 को पाताहातू, पश्चिमी सिंहभूम में हुआ। उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत आजसू के एक कार्यकर्ता के रूप में हुई थी। बाद में आरएसएस के वनवासी कल्याण केंद्र से जुड़ गए। 2000 में हुए विधानसभा चुनाव में वे भाजपा के उम्मीदवार के रूप में जगन्नाथपुर विधानसभा सीट से निर्वाचित हुए। बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में बनने वाली सरकार में वे पंचायती राज मंत्री बने। 2003 में अर्जुन मुंडा की सरकार बनने के बाद भी वे इसी पद पर काबिज रहे। 2005 के विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा ने टिकट नहीं दिया। इसके बावजूद वे जगन्नाथपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीतने में कामयाब रहे। इस बीच राज्य में खंडित जनादेश की वजह से अर्जुन मुंडा के नेतृत्व में बनने वाली बीजेपी की सरकार में उन्होंने बाहर से समर्थन दिया और उन्हें खान एवं भूवैज्ञानिक मामलों का मंत्री बनाया गया। सितंबर 2006 में मधु कोड़ा और अन्य तीन निर्दलीय विधायकों ने अर्जुन मुंडा सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया। जिससे सरकार अल्पमत में आ गई, बाद में यूपीए गठबंधन ने मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट किया और इस प्रकार वे राज्य निर्दलीय मुख्यमंत्री बने।

मधु कोड़ा पर सीएम रहते कोयला घोटाला समेत अन्य कई मामलों में करोड़ों रुपए घोटाले का आरोप है। जिसकी सुनवाई चल रही है। हालांकि उनकी पत्नी गीता कोड़ा जगन्नाथपुर से जय भारत समानता पार्टी की विधायक हैं लेकिन खुद मधु कोड़ा सियासत से दूर हैं वे इन दिनों अपना पूरा समय परिवार और खेती-किसानी को दे रहे हैं।

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