कभी किंगमेकर भी रहे हैं हरिनारायण राय!

झारखंड के कई सियासी सूरमा कभी राजनीति के सूर्य थे, चमकते थे, उनके आस-पास प्रशंसकों की भीड़ थी। पर आज कोई नहीं जानता कि वह कहां हैं! किस हाल में हैं! यही राजनीति है। ऐसे में राजनीति गुरु ने ऐसे गुमनाम सियासी सूरमाओं की वर्तमान स्थिति को खंगालने की कोशिश की है। आप भी ऐसे लोगों के बारे में जानिये...और यह भी जानिये कि ऐसा क्यों हुआ!

झारखंड की राजनीति में कई ऐसे सियासी चेहरे भी हैं जो सूबे की राजनीतिक क्षितिज पर धूमकेतु की तरह आये और अपने कारनामों से सबों की जुबां पर चढ़ गए। कह सकते हैं कि इन्होंने सियासी उठापठक का फायदा कुछ इस कदर उठाया कि अंत में खुद भी कानून की गिरफ्त में आ गए। ऐसा ही एक नाम है, हरिनारायण राय। साल 2005 से लेकर साल 2009 के बीच सूबे की राजनीतिक अस्थिरता का खूब फायदा उठाया और देखते ही देखते करोड़ों में खेलने लगे।

राज्य की राजनीति में हरिनारायण राय ने निर्दलीय विधायकों के साथ मिलकर सियासत का खूब दांव खेला। जब मौका मिला हवा का रुख देख कर वे पाला बदलते रहे। एक के बाद एक 3 सरकारों को अपना समर्थन दिया और मलाई खाते रहे। साल 2005 में जरमुंडी से अपनी सियासी पारी शुरू कर पहली बार विधायक बनने वाले हरिनारायण राय झारखंड के किंगमेकर बने। फिलहाल राजनीति दूर हैं और मनी लाउंड्रिंग ऐक्ट के तहत दोषी ठहराये गए हैं। इस केस में उनकी पत्नी सुशीला देवी और भाई संजय राय पर भी मुकदमा चल रहा है।

वैसे देखा जाय तो कोड़ा मंत्रिमंडल में रहे 14 में से 5 लोग जेल की हवा खा रहे हैं, जिस में मुख्यमंत्री रहे मधु कोड़ा भी शामिल हैं।

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