सूबे की सियासत में हाशिए पर क्यों हैं गिरिनाथ!

झारखंड के कई सियासी सूरमा कभी राजनीति के सूर्य थे, चमकते थे, उनके आस-पास प्रशंसकों की भीड़ थी। पर आज कोई नहीं जानता कि वह कहां हैं! किस हाल में हैं! यही राजनीति है। ऐसे में राजनीति गुरु ने ऐसे गुमनाम सियासी सूरमाओं की वर्तमान स्थिति को खंगालने की कोशिश की है। आप भी ऐसे लोगों के बारे में जानिये...और यह भी जानिये कि ऐसा क्यों हुआ!

झारखंड में कभी राजद का मतलब गिरिनाथ सिंह हुआ करता था। विरासत में मिली राजनीति को करीब दो दशक तक गिरिनाथ सिंह ने संभाले रखा। बिहार में मंत्री भी रहे। झारखंड बनने के बाद विधायक दल के नेता भी रहे। 2005 में गिरिनाथ सिंह से विधायक दल के नेता का पद भी छीन गया। गढ़वा विधानसभा क्षेत्र से पहले 2009 में फिर 2014 में सत्येंद्रनाथ तिवारी ने उन्हें पटकनी दी। इसके बावजूद झारखंड राजद प्रदेश अध्यक्ष का कमान सौंपा गया। लेकिन उस पर भी वे ज्यादा दिन तक खरा नहीं उतर सके। नतीजतन उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी से हाथ धोना पड़ा। कभी मधुकोड़ा की सरकार में अपने हिसाब से सत्ता को घुमाने वाले गिरिनाथ सिंह आज झारखंड की सियासत में हाशिए में चले गए हैं।

वैसे देखा जाय तो 2014 के विधानसभा चुनाव में राजद सूबे में एक सीट पर भी कब्जा नहीं कर पाई है हालांकि मिशन 2019 की तैयारी में पार्टी जुटी हुई है और अन्नपूर्णा देवी की अगुवाई में राजद की टीम काम कर रही है। वहीं चारा घोटाले के मामले में रांची के होटवार जेल में बंद पार्टी सुप्रीमो लालू यादव प्रदेश पदाधिकारियों के संपर्क में हैं और महागठबंधन की कवायद में अहम रोल निभा रहे हैं। अब देखना है कि राजद आगामी चुनाव में जनता का कितना भरोसा जीत पाती है।

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