एनोस एक्का का विवादों से रहा चोली-दामन का साथ!

झारखंड के कई सियासी सूरमा कभी राजनीति के सूर्य थे, चमकते थे, उनके आस-पास प्रशंसकों की भीड़ थी। पर आज कोई नहीं जानता कि वह कहां हैं! किस हाल में हैं! यही राजनीति है। ऐसे में राजनीति गुरु ने ऐसे गुमनाम सियासी सूरमाओं की वर्तमान स्थिति को खंगालने की कोशिश की है। आप भी ऐसे लोगों के बारे में जानिये...और यह भी जानिये कि ऐसा क्यों हुआ!

सूबे की सियासत में कई ऐसे राजनीतिज्ञ हैं जो हमेशा विवादों में बने रहते हैं। हालांकि इससे उनके जनाधार को जोड़कर नहीं देखा जा सकता है। क्योंकि ऐसा देखा गया है कि कई गंभीर आरोपों के बावजूद ये अपनी सियासी जमीन बचाने में सफल रहे हैं। ऐसे ही एक सियासी शख्सियत हैं पूर्व मंत्री और कोलेबिरा से विधायक एनोस एक्का।

एनोस एक्का तब झारखंड की राजनीति की सुर्खियों में आए जब वे पूर्व मुख्यमंत्री कोड़ा के राज में मंत्री बने। इस दौरान उन पर करोड़ों रुपए की हेराफेरी के आरोप लगे। कहा जाता है कि इस दौरान 2009 में एनोस एक्का के कई ठिकानों पर निगरानी के छापे पड़े और उनकी पत्नी के नाम पर करोड़ों रुपए की संपत्ति के कागजात बरामद किए गए।

देखा जाय तो इसके बाद भी एनोस एक्का की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई और वे 2005, 2009 और 2014 में कोलेबिरा विधानसभा सीट से चुनाव जीतते रहे। पहली बार वे जन क्रांति पार्टी से चुनाव जीते जबकि दूसरी और तीसरी बार झारखंड पार्टी के बैनर तले चुनाव में जीत दर्ज की।

हालांकि 2014 में उन्होंने खूंटी लोकसभा से झारखंड पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर किस्मत आजमाया, पर वे सफल नहीं हो सके। इस दौरान उनपर पीएलएफआइ के जोनल कमांडर जेठा कच्छप से चुनाव में लाभ लेने का आरोप लगा। इसके बाद एक बार फिर पारा शिक्षक मनोज की हत्या के मामले में एनोस एक्का को गिरफ्तार किया गया। कुल मिलाकर देखा जाय तो एनोस एक्का का राजनीतिक सफर हमेशा विवादों से भरा रहा और यदि आनेवाले समय में कोई विपरित फैसला आता है तो उनके चुनाव लड़ने पर भी प्रतिबंध लग सकता है।

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