बागुन बाबू के सियासी तजुर्बे के कद्रदान हैं सभी !

झारखंड के कई सियासी सूरमा कभी राजनीति के सूर्य थे, चमकते थे, उनके आस-पास प्रशंसकों की भीड़ थी। पर आज कोई नहीं जानता कि वह कहां हैं! किस हाल में हैं! यही राजनीति है। ऐसे में राजनीति गुरु ने ऐसे गुमनाम सियासी सूरमाओं की वर्तमान स्थिति को खंगालने की कोशिश की है। आप भी ऐसे लोगों के बारे में जानिये...और यह भी जानिये कि ऐसा क्यों हुआ!

झारखंड की सियासत के सबसे बड़े चेहरों में एक बागुन सुम्ब्रुई एक मात्र ऐसे शख्स हैं जिन्होंने राजनीति में एक लंबा सफर तय किया है इसके बावजूद उनका जीवन बेहद सादगी भरा और बेदाग है। पांच बार सांसद, चार बार विधायक और मंत्री रहे बागुन सुम्ब्रुई आज भी दो कमरों के घर में रहते हैं। उनके बारे में वैसे तो कई दिलचस्प किस्से हैं लेकिन कहा जाता है कि सात दशक पहले 1942 से उन्होंने अपने शरीर के ऊपर कपड़े नहीं पहने हैं। उनकी सादगी और सहजता के चलते गांधी परिवार के सबसे करीबी और पसंदीदा सांसदों में से एक रहे हैं। चाहे सर्दी हो या गर्मी या फिर बरसात का मौसम; बागुन बाबू सिर्फ धोती ही पहनते हैं, वे धोती पहनकर ही ससंद भवन और विधानसभा जाते थे। वे झारखंड राज्य के पहले विधानसभा उपाध्यक्ष बने।

1945 में 10वीं क्लास पास कर चुके बागुन सुम्ब्रुई झारखंड के चाईबासा जिले में रहते हैं। स्थानीय लोग उन्हें बागुन बाबू नाम से पुकारते हैं। पहली बार वे 1977 में सांसद चुने गए थे और 1991 तक तीन बार सांसद रहे। इसके अलावा बागुन बाबू 1967 में पहली बार बिहार विधानसभा में चुनकर पहुंचे थे। 1977 तक वे विधायकी के तीन टर्म पूरे कर चुके थे। बहरहाल सियासत से इतर बागुन बाबू की निजी जिंदगी भी बेहद रोचक है, उनकी पहली शादी 1942 में हुई थी और अब उनके कई बेटे-बेटियां और पोते-पोतियां हैं। उन्होंने करीब दो दर्जन से ज्यादा शादियां कीं, लेकिन उन्हें किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।

एक बार पूर्व सांसद सुम्ब्रुई ने कई शादियों की वजह बताते हुए कहा था कि वे कभी किसी लड़की या महिला के पीछे नहीं भागे, बल्कि वो ही चलकर उनके पास आईं। यदि वे मेरी तरफ आकर्षित हो रही थीं, तो मैं क्या कर सकता था? मैं उनको निराश नहीं कर सकता था, जो मुझसे शादी करना चाहती थीं। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि ज्यादातर आदिवासी महिलाओं ने उनसे तब शादी की, जब वे सांसद चुने जाने लगे। बागुन बाबू भले ही सत्ता से दूर हैं पर उनकी सादगी और सियासी तजुर्बे के कद्रदान सूबे के सभी नेता हैं।

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