GST में बदलाव का ‘सियासी तीर’ क्या निशाने पर लगेगा!

सियासत में मुद्दे भी वक्त के मुताबिक बदलते रहते हैं। विरोधियों की मानें तो कभी मोदी जीएसटी के खिलाफ थे आज जीएसटी के पक्ष में हैं। गाजे बाजे के साथ लागू किया गया जीएसटी पर बुधवार को पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बैकफुट पर दिखे। जीएसटी में सुधार या यूं कहें बदलाव के संकेत कंपनी सेक्रेटरीज के उस कार्यक्रम में पीएम ने दे दिये। जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी के तहत कई तरह की छूटों की घोषणा की। इससे छोटे कारोबारियों, निर्यातकों और उपभोक्ताओं को काफी राहत मिलने की संभावना है।

जीएसटी लागू होने के बाद से ही पूरे देश में छोटे और मझोले व्यापारी आंदोलनरत थे। सूरत से लेकर महाराष्ट्र तक में इसका व्यापक असर दिख रहा था। व्यापारियों के मुताबिक नोटबंदी से टूटी कमर अब मरणासन्न हो गई थी। नोटबंदी तो सियासी फायदे नुकसान के धरातल पर बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हुआ। लेकिन गहरी सियासी समझ रखने वाले पीएम मोदी को जीएसटी से व्यापारियों का उमड़ रहा गुस्सा साफ दिखने लगा था इसका असर हुआ और बदलाव के संकेत बुधवार से मिलने लगे।

सियासी गलियारे में यह भी चर्चा है कि अमित शाह ने भी जीएसटी से गुजरात चुनाव में नुकसान होने का संदेश दे दिया था। यह सर्वविदित है कि व्यापारी बीजेपी के कोर वोट बैंक रहे हैं। इनका गुस्सा होना गुजरात चुनाव के लिए शुभ संकेत नहीं थे। आपको बता दें कि गुजरात के कपड़ा व्यापारियों ने 2014 में मोदी लाओ देश बचाओ का नारा लगाया था। आज सूरत से लेकर महाराष्ट्र तक कपड़ा व्यापारी बहुत परेशान हैं, इसलिए वो अपना गुस्सा कई तरह से जाहिर कर रहे हैं। जिसका चुनाव पर असर दिखना स्वभाविक था.. बस उसी गुस्से को देखते हुए नये बदलाव को सहूलियत का रंग दिया गया है।

अपने कोर वोट बैंक को राहत देकर गुजरात समेत पूरे देश में संतुष्ट करने का संकेत बीजेपी नेतृत्व केंद्र सरकार ने दी है। हालांकि अब देखना ये है कि क्या GST में बदलाव का 'सियासी तीर' निशाने पर लगेगा!

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