रघुवर की कहानी का पीएम ने नोटिस भी नहीं लिया

क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का रघुवर दास पर से विश्वास खत्म हो गया है. कम से कम हाल की गतिविधियों से तो यही उजागर हो रहा है. 21 सितम्बर को मुख्यमंत्री दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री से मिले, उन्हें एक बुकलेट सौंपी. इस बुकलेट में रघुवर सरकार की हजार दिन की उपलब्धियों का जिक्र है. 40 मिनट तक प्रधानमंत्री ने इनसे बात की और फिर रघुवर दास बिना किसी से मिले सीधे रांची लौट आये.

अमूमन होता यह है कि किसी भी मुख्यमंत्री या केन्द्रीय मन्त्री की उपलब्धि पर पीएम या पीएमओ ट्वीट कर बधाई देता है. पर झारखंड सरकार के 1000 दिनों की उपलब्धि पर एक लाइन का मेसेज भी प्रधानमंत्री जी ने नहीं दिया. इसे लेकर मुख्यमंत्री के खासमखास सिपहसलार भी चिंतित हैं.

झारखंड की राजनीति को समझने वाले इसे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के हाल के दौरे से जोडकर भी देख रहे हैं. रांची प्रवास के दौरान तो अमित शाह ने सार्वजनिक तौर पर रघुवर की खूब पीठ ठोंकी, ऐसा रणनीति के तहत भी किया ही जाता है,पर दिल्ली दरबार को उन्होंने कुछ ऐसी रिपोर्ट दी है, जिसपर प्रधानमंत्री असहज महसूस कर रहे हैं. यह साफ़-साफ़ दिख भी रहा है.

रघुवर दास की छोटी उपलब्धियों पर भी इनकी पीठ थपथपाने वाले मोदी जी की चुप्पी के कई राजनीतिक निहितार्थ निकाले जा रहे हैं.

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