18 को अन्ना की आंधी देखेगा पटना

18 दिसंबर को अन्ना हजारे पटना में रहेंगे| उनका कार्यक्रम तय हो गया है| परेशान और आर्थिक रूप से जर्जर हो चुके बिहार के वृद्ध किसानों के लिए पेंशन की मांग करने तथा लोकायुक्त को और सशक्त बनाने समेत कई मांगों को लेकर अन्ना हजारे बिहारवासियों को जागरूक करेंगे| वृद्ध किसानों की दुर्दशा को लेकर अन्ना जेपी गोलम्बर पर एक घंटे का मौन रखेंगे और एसके मेमोरियल हॉल में तमाम परिवर्तनकारी शक्तियों का आह्वान करेंगे| अन्ना के आने की खबर से बिहार की राजनीति गरमा गयी है| जिन सवालों को अन्ना और उनकी टीम उठा रही है उससे नीतीश सरकार का सरदर्द बढना तय है|

अन्ना के कार्यक्रम की जानकारी देते हुए टीम अन्ना के बिहार प्रभारी संजय सिसोदिया ने बताया कि अन्ना लोकपाल के सवाल पर केंद्र की भाजपा सरकार की वादाखिलाफी से बेहद क्षुब्ध हैं और इस बार दिल्ली में लोकपाल के सवाल पर आर-पार की लड़ाई होगी| अन्ना देश के हर हिस्से में घूम-घूमकर परिवर्तनकारी शक्तियों से दिल्ली चलने और भाजपा सरकार पर जन दवाब बनाने की अपील करेंगे| 18 दिसंबर से राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत बिहार की धरती से होगी|

संजय सिसोदिया ने बताया कि निष्कलंक समाज सेवा के प्रतीक अन्ना हजारे ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को लोकपाल के सम्बन्ध में अब तक 22 बार पत्र लिखा लेकिन एक का भी जवाब देने की शालीनता प्रधानमंत्री कार्यालय ने नहीं दिखाई| जबकि कांग्रेस सरकार अन्ना के हर पत्र का जवाब जरुर देती थी|

केरल में अभी 60 से ऊपर के किसानों को 1500 पेंशन मिलती है| महाराष्ट्र सरकार ने 3000 पेंशन की योजना बनाई है| बिहार में 5000 पेंशन देने की मांग की जा रही है| यहाँ वृद्ध किसान या खेतिहर मजदूर इस उम्र में एक एक रूपये के मोहताज़ हैं| संजय सिसोदिया ने बताया कि सरकार 74 के आन्दोलनकारियों समेत कई तरह के पेंशन लोगों को दे रही है| ऐसे में जीवन भर खेतों में काम करने वाले अन्नदाता को पेंशन देना ही होगा|

संजय सिसोदिया ने बताया कि केंद्र सरकार ने लोकपाल बिल तो नहीं पारित किया, वो विपक्ष का नेता नहीं होने का बहाना बना रही है, जबकि सीबीआई निदेशक समेत कई नियुक्ति आखिर कैसे कर दी गयी| इतना ही नहीं 2016 में लोकपाल के पुराने ड्राफ्ट को ही सरकार ने बदल दिया| पहले से तय था कि आईएएस को अपनी संपत्ति का ब्यौरा देना होगा लेकिन मोदी सरकार ने आनन फानन में यह परिवर्तन कर दिया कि नौकरशाह संपत्ति का ब्यौरा नहीं देंगे| आखिर सरकार किसे बचाना चाहती है! संजय सिसोदिया कहते हैं कि केंद्र की नीयत साफ़ नहीं है|

बिहार में अन्ना के कार्यक्रम में संजय सिसोदिया के अलावा डॉ उमाकांत पाठक, डॉ दिवाकर तेजस्वी,आकांक्षा भटनागर,रामउपदेश सिंह, पंचम लाल,अमरदीप झा गौतम,दिनेश शाहनी,ज्ञानेश्वर गौतम, विद्यानंद शुक्ल समेत कई बड़े नाम लगे हुए हैं|

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