कहीं पत्थलगड़ी बिगाड़ ने दे BJP का सियासी समीकरण !

पूरे देश में चुनावी माहौल धीरे-धीरे बनता जा रहा है, सत्तापक्ष और विपक्ष इसकी कवायद में पूरी तरह जुट गए हैं। सूबे में भी इसकी सुगबुगाहट शुरू हो गई है। झामुमो और कांग्रेस के बीच आगामी चुनावों के मद्देनजर समझौता हो गया है। इधर, एनडीए गठबंधन भी चुनावी रंग में रंग चुका है। हालांकि बीजेपी की राह में कई रोड़े हैं जिसे दूर करना होगा। बीजेपी को सरकार में रहने के कारण कई मुश्किल भरी चुनौतियों से सामना करना पड़ रहा है। अब देखना है कि इन चुनौतियों से बीजेपी कैसे उबर पाती है।

जानकारों की मानें तो राज्य का आदिवासी समाज धीरे-धीरे सरकार की नीतियों के कारण बीजेपी से दूर होता जा रहा है। स्थानीय नीति, नियोजन नीति, कुरमी तेली को एसटी का दर्जा दिए जाने की मांग आदि को लेकर आदिवासी समाज सरकार के खिलाफ होता जा रहा है।

इन सब के बीच पत्थलगड़ी को लेकर भी खूंटी सहित कई अन्य क्षेत्रों में भी आदिवासी धीरे-धीरे सरकार के खिलाफ लामबंद होने लगे हैं। हालांकि कुछ आदिवासी संगठनों ने संविधान के खिलाफ पत्थलगड़ी किए जाने पर इसका विरोध भी किया है लेकिन कुल मिलाकर सरकार के लिए यह एक चिंता का विषय जरूर है। संघ के पदाधिकारियों ने भी आरोप लगाया है कि पत्थलगड़ी के पीछे वैसी विदेशी संस्थाओं का हाथ है जिन्हें सरकार ने फंडिंग बंद कर दी है या जिनके द्वारा किए जा रहे कार्यों की सख्ती से मॉनिटरिंग हो रही है। संघ के पदाधिकारियों ने तो यहां तक कहा है कि चर्च के लोगों की मिलीभगत से ही पत्थलगड़ी हो रहा है।

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