सीएम आवास घेरने निकले पारा शिक्षक!

झारखंड में एक तरफ सरकारी स्कूलों में शिक्षा की स्थिति दिनों-दिन बदतर होती जा रही है वहीं दूसरी ओर सरकार स्मार्ट स्कूलों की बात करती है। सरकार के वादे जमीन पर उतरते नहीं दिखाई दे रहे हैं। सरकार भले ही कहे कि स्कूलों से बच्चों का ड्रॉप आउट रेट कम हुआ है पर ये सच है कि इसमें बढ़ोतरी हुई है। सरकार ने हाल ही में ऐसे स्कूलों को समायोजित करने का निर्णय लिया है जहां बच्चों की संख्या कम है, सरकार के इस फैसले पर विपक्ष ने इस पर कड़ा एतराज भी जताया था। लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। दूर-दराज के इलाकों में सरकार का दावा है कि हर प्रकार की सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं लेकिन इसके बाद भी बच्चों की इन स्कूलों में कम उपस्थिति कई सवाल खड़े करता है।

इन सब के बीच सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई में अपना अहम योगदान दे रहे पारा शिक्षकों की कई मांगें हैं जिस पर सरकार का रुख स्पष्ट नहीं है। इसी कारण अपनी पांच सूत्री मांगों को लेकर सूबे के 70 हजार पारा शिक्षकों ने मंगलवार से पदयात्रा की शुरूआत की है। यह पदयात्रा अलग-अलग जिलों से जत्थे में रांची के लिए रवाना हुई है। पारा शिक्षकों के नेता संजय दूबे ने कहना है कि सरकार ने उनकी पांच मांगों पर अबतक कोई पहल नहीं की। इसमें सेवा नियमित करना, समान काम के बदले समान वेतन, विद्यालयों के मर्ज को रोकना, पारा शिक्षकों को ईपीएफ का लाभ, डीएलए की राशि को वापस करने और टेट पास अभ्यर्थियों की सीधी नियुक्ति की मांग शामिल हैं। सरकार की बेरूखी के खिलाफ यह पदयात्रा निकाली गई है।

जानकारी के अनुसार पारा शिक्षकों की यह पदयात्रा आगामी 23 अप्रैल को रांची पहुंचेगी और सीएम आवास के पास अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा। यह पदयात्रा पांच प्रमंडलों, उत्तरी छोटानागपुर में कोडरमा, दक्षिणी छोटानागपुर में गुमला, पलामू प्रमंडल में मेदिनीनगर, संथाल परगना में देवघर और कोल्हान प्रमंडल में जमशेदपुर से शुरू हुई है। अपनी मांगों के समर्थन में पारा शिक्षक एक मई को भूख हड़ताल पर भी रहेंगे।

मोर्चा के अनुसार पारा शिक्षक 2004 से लंबित मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और इसी क्रम में राज्य के 81 विधायकों, 14 सांसदों और सीएम के नाम बीते फरवरी में मांग पत्र सौंपा गया था। 10 मार्च को शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव किया गया। उसके बाद दो दिनों में सीएम से वार्ता कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज तक सीएम से बातचीत नहीं हुई। यह साफ बताता है कि पारा शिक्षकों की समस्याओं को लेकर सरकार गंभीर नहीं है।

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