रघुवर के खिलाफ विपक्ष का उलगुलान

भाजपा सरकार घेरने के लिए सारे विपक्षी दल एक बार फिर एक मंच पर जुटेंगे। रघुवर सरकार पर हमला बोलेंगे। महारैली के आयोजन में मुख्य भूमिका निभा रहे झारखंड मोर्चा के बंधु तिर्की के तेवर को देखते हुए यह अंदाज लगाया जा सकता है कि उन्हें विपक्षी दलों के नेताओं का भी भरपूर समर्थन मिल रहा है। सियासी तौर पर महा गठबंधन की गांठ मजबूत हो रही है और ऐसा ही चलता रहा तो समाजिक और जातीय समीकरण की बुनियाद भी धीरे -धीरे विपक्षी खेमे का रुख करने लगेगी।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार विपक्ष यह भलिभांति जानता है कि बिना आक्रामक तेवर अख्तियार किए भाजपा से मुकाबला करना आसान नहीं होगा। इसलिए सरकार के फैसलों पर खास कर वैसे मुद्दे संवेदनशील हैं उन पर हमलावर होना जरूरी है। जैसा कि सीएनटी के मामले में हुआ। आखिरकार रघुवर सरकार को फैसला वापस लेना पड़ा। बहरहाल, विपक्ष को भी यही लगता है कि ऐसी तेवर की बदौलत वे आने वाले दिनों में जनता का भरोसा जीतने में कामयाब होंगे।

राजनीतिक जानकारों की मानें तो रघुवर सरकार ने विपक्ष को घेरने के लिए कई मुद्दे दे दिया है। धर्मांतरण बिल गो हत्या, भूमि अधिग्रहण बिल पर तो सरकार पहले से ही बैक फुट पर थी। अब सिमडेगा, गढ़वा और धनबाद में राशन नहीं मिलने की वजह से भूख से हुई मौतों ने सरकार को एक बार फिर कटघरे में खड़ा कर दिया है। इतना ही नहीं शासन स्तर पर मंत्रियों और अधिकारियों के बीच तालमेल का पूरी तरह से फेल होना सरकार की साख पर कई सवाल खड़े कर गया।

उधर, विपक्ष को भी बैठे -बिठाए एक और नया मुद्दा मिल गया कि सरकार जमीन पर कम और हवा- हवाई ज्यादा काम कर रही है। मोमेंटम झारखंड हो, सरकार की 1000 दिन की उपलब्धियां या झारखंड माइनिंग शो, विपक्ष जनता को समझाने में सफल दिख रहा है कि सरकार आदिवासी अस्मिता के खिलाफ काम कर रही है। झारखंड मुक्ति मोर्चा, झारखंड विकास मोर्चा, कांग्रेस, राजद और वाम दलों का महाजुटान भाजपा के मिशन 2019 पर पानी फेरने की कोशिश हो। पर इन सब के बीच यह देखना भी काफी दिलचस्प होगा की एनडीए की ओर से एक जुट होती विपक्षी एकता का जवाब कैसे दिया जाता है। किस मुद्दे पर सत्ताधारी दल विपक्ष पर निशाना साधता है।

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