बिना संशोधन एक साथ चुनाव संभव नहीं- CEC

पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष देश में एक साथ विधानसभा और लोकसभा चुनाव कराने के पक्ष में रहे हैं, उनका कहना है कि इससे देश में चुनावों पर होने वाले खर्च का बोझ कम होगा और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उनका कहना है कि आचार संहिता और देश के कई राज्यों में लगातार होनेवाले चुनाव से विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न होती है। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने विधि आयोग को पत्र लिखकर एक बार फिर इस मुद्दे को गरमा दिया है। अब इस पर मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत की टिप्पणी भी सामने आ गई है। ओपी रावत ने कहा है कि फिलहाल पूरे देश में एक साथ चुनाव संभव नहीं है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि अगर चरणबद्ध तरीके से कराया जाए तो कई राज्यों के चुनाव आम चुनावों के साथ संभव हैं। चुनाव आयुक्त ने कहा कि देश में पहले चार चुनाव एक साथ ही थे। अगर कानून में संशोधन हो, मशीनें पर्याप्त हों और सुरक्षाकर्मी जरूरत के हिसाब से हों, तो ऐसा संभव है। वहीं चुनाव आयुक्त ने कहा कि राज्य विधानसभाएं अगर सहमत हो जाएं तो एक साथ चुनाव कराना संभव है।

ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि केंद्र सरकार अगले साल लोकसभा चुनावों के साथ 10-11 राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ करा सकती है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि अगर पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने की बात तो बिना संशोधन के संभव नहीं दिखता।

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