माननीयों के दादागीरी से रोष में हैं अफसर!

जनप्रतिनिधियों और सरकारी अफसरों के बीच अदावत की खबरें हमेशा सुर्खियों में रही हैं। लेकिन ऐसी घटनाएं इन दिनों कुछ ज्यादा तेजी से बढ़ी हैं। देखा जा रहा है कि आये दिन पदाधिकारियों से मंत्री, विधायकों की झड़प सरेआम हो जा रही है, ऐसी घटना न तो जनप्रतिनिधियों और न ही पदाधिकारियों और न ही आम जनता के हित में है। क्योंकि कहीं न कहीं इससे जनता का काम प्रभावित होता है।

बहरहाल, झारखंड में विधायकों, मंत्रियों द्वारा प्रशासनिक महकमे को धमकाना उनके साथ मारपीट करना कोई नई बात नहीं है। खासकर बीजेपी विधायकों, मंत्रियों ने ऐसे कई कारनामों से पूरी विधायिका को शर्मसार किया है। ताजा मामला है चांडिल का जहां बीजेपी विधायक साधुचरण महतो और उनके समर्थकों ने गुरुवार को भू- अर्जन पदाधिकारी दीपू कुमार की पिटाई कर दी। जानकारी के अनुसार जमीन अधिग्रहण को लेकर नीमडीह प्रखंड के रघुनाथपुर दुर्गा मंदिर में मुआवजा भुगतान को लेकर बैठक थी, ग्रामीणों का आरोप था कि भूमि अधिग्रहण के एवज में मुआवजा काफी कम दिया जा रहा है, वहीं भू-अर्जन पदाधिकारी खड़े थे, विधायक ने उन्हें जमीन पर बैठने को कहा तो मना कर दी इस पर कहा सुनी हुई तो विधायक और ग्रामीणों ने पदाधिकारी की पिटाई कर दी।

कुछ वक्त पहले राज्य की शिक्षा मंत्री नीरा यादव ने सरेआम कोडरमा डीडीसी को फटकार लगाई थी उन्हें बेवकूफ कहा और जेल भेजने की बात कही। कुछ समय पहले बीजेपी नेता और पूर्व विधायक उमाशंकर अकेला ने रेंजर के साथ बदसलूकी की थी।

बाधमारा से बीजेपी के विधायक ढूल्लू महतो आये दिन अपने कारनामों से सुर्खियों में रहते हैं वैसे उन पर एक दर्जन से ज्यादा आपराधिक मामले पहले से ही दर्ज हैं। कुछ महीने पहले ढुल्लू महतो और उनके समर्थकों ने जबरन राजेश नामक कार्यकर्ता को पुलिस हिरासत से छुड़ा लिया। इस दौरान पुलिस के साथ ढुलू व उनके समर्थकों ने मारपीट की थी, जवान की वर्दी फाड़ डाली। भिड़ंत में पुलिस का जवान रामवचन घायल हो गया था।

देखा जाय तो पिछले कुछ अर्से से इस तरह की घटनाएं लगातार हो रही हैं जिससे राज्य के पदाधिकारियों के मनोबल बुरा असर पड़ा है वहीं उनके संगठन झासा द्वारा आपत्ति जताए जाने के बावजूद ऐसे घटनाएं नहीं रूक रही हैं। कहा जा रहा है कि जनप्रतिनिधियों के ऐसे रवैये से अत्यधिक दबाव में काम कर रहे राज्य सेवा के पदाधिकारियों में रोष है। बता दें कि पिछले 17 सालों में सरकार ने राज्य सेवा के पदाधिकारियों की नियुक्तियां नहीं के बराबर की हैं।

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