SC के फैसले के बाद OBC आरक्षण को लेकर झारखंड में गरमाएगी सियासत

सुप्रीम कोर्ट ने एससी, एसटी को प्रमोशन में आरक्षण पर अहम फैसला सुनाया है। इस फैसले में सीधे तौर पर प्रमोशन में आरक्षण को खारिज नहीं किया गया, बल्कि इस मामले को राज्य सरकारों पर छोड़ दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एससी, एसटी कर्मचारियों को नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण देने के लिए राज्य सरकारों को उनके पिछड़ेपन पर उनकी संख्या बताने वाला आंकड़ा इकट्ठा करने की कोई जरूरत नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की यह अर्जी भी खारिज कर दी कि एससी, एसटी को आरक्षण दिए जाने में उनकी कुल आबादी पर विचार किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट कोर्ट का फैसला ऐसे समय में आया है जब झारखंड में भी ओबीसी आरक्षण का मुद्दा गरमाया हुआ है। अलग राज्य बनने के बाद से ही राज्य के पिछड़े वर्ग द्वारा इसको लेकर आवाज उठायी जा रही है लेकिन अभी तक किसी भी सरकार ने इस पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया है। जिसके कारण राज्य के पिछड़ों को उनका हक नहीं मिल सका है। झारखंड ओबीसी की आबादी तकरीबन 47 प्रतिशत है, लेकिन उसे मात्र 14 प्रतिशत आरक्षण का झुनझुना थमा दिया गया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पिछड़े वर्गों के लिए स्वीकृत मंडल कमीशन की अनुशंसा के अनुसार राजकीय पदों में पिछड़ों का आरक्षण 27 प्रतिशत लागू किया जाना चाहिए। देखा जाय तो दक्षिण भारत के राज्यों की स्थिति इस मामले में बेहतर है। तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों में तो पिछड़ी जातियों की आरक्षण सीमा आज भी 70 फ़ीसदी से अधिक है। लेकिन झारखंड की स्थिति इसके ठीक उलट है यहां बेहद अन्याय पूर्ण तरीके से यहां इन्हें मिलने वाले आरक्षण को पूर्व से मिल रहे आरक्षण कोटे का तकरीबन आधा कर दिया गया है, झारखंड राज्य निर्माण के पूर्व बिहार प्रदेश का हिस्सा था एवं सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को 26 प्रतिशत आरक्षण कोटे का लाभ मिल रहा था। नए राज्य के जन्म के साथ ही यह कोटा 26 से घटाकर 14 फीसदी कर दिया गया।

झारखंड सरकार की आरक्षण नीति का खामियाजा तो पिछड़े वर्ग को भुगतना ही पड़ा है इसका ज्यादा असर शिड्यूल एरिया के 6 जिलों के बेरोजगार युवाओं पर बेहद प्रतिकूल रूप से पड़ा है।
पलामू, दुमका, संथाल परगना एवं कोल्हान प्रमंडल के साथ ही कई जिलों खूंटी, सिमडेगा, लोहरदगा, गुमला, लातेहार एवं दुमका जिले में पिछड़ी जातियों का आरक्षण शुन्य कर दिया गया है।
राज्य स्तरीय आरक्षण की 14 प्रतिशत की सीमा के विरुद्ध जिला स्तरीय आरक्षण की सीमा रांची में 2 प्रतिशत, साहिबगंज, पाकुड़, सरायकेला-खरसावां में 7 प्रतिशत एवं गोड्डा एवं जामताड़ा में 9 प्रतिशत अधिकतम तय की गई।

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