बजट में विकास का विजन नहीं: डॉ. अजय कुमार

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार ने झारखंड के बजट जनता को निराश करने वाला बजट बताया है। उन्होंने कहा कि सदन में आर्थिक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में क्रोनिक कुपोषण का अनुपात बढ़ा है। कुपोषण से जूझ रहे झारखंड को बजट से बहुत उम्मीद थी कि कल्याण (समाज कल्याण) में एक दिखलायी पड़ने वाली स्पष्ट बढ़ोत्तरी होगी लेकिन पिछले बजट में 7.10 प्रतिशत की हिस्सेदारी कल्याण विभाग की थी, जो इस बार के बजट में 7.14 प्रतिशत हो गयी है।

डॉ अजय कुमार ने कहा कि ग्रामीणों की आय दोगुना करने की घोषणा मुख्यमंत्री ने पिछले बजट में की थी, परंतु पेश बजट से मालूम हो रहा है कि मुख्यमंत्री आय बढ़ाने के रोडमैप में भटक गये हैं। वर्ष 2016-17 में आय 64,823 रुपये सालाना औसत आय थी, जिसे बढ़कार 70,468 रुपये के आय का अनुमान वर्ष 2017-18 के लिए लगाया गया है, जो मात्र नौ प्रतिशत की वृद्धि दर है। बजट में विकास का कोई विजन नहीं दिखा। न ग्रामीणों के लिए, न मजदूरों के लिए, और न ही कुपोषण के लिए कुछ नहीं है।

डॉ अजय कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में व्यय के मामले में झारखंड काफी पीछे है। परंतु बजटीय प्रावधान सरकार की उदासीनता को ही बयां कर रहा है। मालूम हो कि पिछले बजट में शिक्षा की 13.90 प्रतिशत की भागीदारी थी, जिसमें 13.94 प्रतिशत ही किया गया है। इसी तरह हेल्थ सेक्टर की भागीदारी को 4.10 प्रतिशत की तुलना में बजट 2018 में मात्र 4.77 प्रतिशत ही किया गया। मजदूर से मुख्यमंत्री बने रघुवर दास ने बजट में राज्य के मनरेगा मजदूरों की कोई सुध नहीं ली। मनरेगा मजदूरों को आशा थी कि राज्य में लागू न्यूनतम मजदूरी का प्रावधान मनरेगा मजदूरों के लिए किया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मनरेगा मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी से कम पर काम करना पड़ रहा है।

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