ना चाचा सुधर रहे, ना भतीजा

-लोहिया ट्रस्ट से रामगोपाल बाहर, नए सचिव बने शिवपाल

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले मुलायम सिंह के आंगन में छिड़ी जंग अभी भी जारी है। चाचा भतीजे की कड़वाहट के चलते ही एसपी को यूपी की सत्ता गंवानी पड़ी और आज भी समाजवादी पार्टी का जनाधार और मुलायम कुनबे का राजनीतिक भविष्य कठिन दौर से गुजर रहा है।इसके बाद भी शिवपाल और अखिलेश एक दूसरे को मात देने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते हैं।

मुलायम सिंह यादव ने आज (गुरुवार) लोहिया ट्रस्ट की बैठक बुलाई, जिसमें सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव, रामगोपाल यादव, आजम खान, धर्मेंद्र यादव और बलराम यादव शामिल नहीं हुए।वहीं अखिलेश गुट ने मुलायम की इस बैठक का बहिष्कार कर दिया।समाजवादी पार्टी के राज्य स्तरीय सम्मलेन से पहले आज लोहिया ट्रस्ट में बड़ा फेरबदल हुआ है। जैसा कि किसी अहम फैसले का अनुमान था, इसी के मद्देनजर पार्टी सरंक्षक मुलायम यादव ने रामगोपाल यादव को सचिव पद से हटा दिया है। साथ ही उनकी जगह शिवपाल यादव नए सचिव के रुप में घोषित हुए है। इसी दौरान मुलायम द्वारा नए सचिव घोषित हुए शिवपाल यादव ने बड़ा बयान दे दिया है। शिवपाल ने कहा है कि पार्टी में किसे रखना है किसे हटाना है नेताजी का फैसला है। साथ ही शिवपाल ने कहा है कि अब 25 सितंबर को नेता जी की प्रेस कांफ्रेंस है। प्रेस कांफ्रेंस में ही आगे की रणनीति तय होगी।

वहीं पार्टी सूत्र के मुताबिक आगरा में होने वाले राष्ट्रीय अधिवेशन में मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई व पूर्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव को पार्टी से निकाल दिया जाएगा।गौरतलब है कि शिवपाल सेकुलर मोर्चे के नाम से नया संगठन खड़ा करने की बात कहते रहे हैं। मुलायम को आशंका है कि शिवपाल को पार्टी से निकाले जाने के बाद पार्टी में सियासी बवंडर के साथ-साथ परिवार को एक जुट रख पाना मुश्किल होगा।

विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश ने चाचा रामगोपाल यादव के साथ मिलकर शिवपाल को ठिकाने लगाया।इतना ही नहीं पार्टी की कमान भी अपने हाथों में ले ली। इसके बाद से ही शिवपाल मुलायम के सहारे अखिलेश को राजनीतिक मात देने की कवायद कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उनका सपना साकार नहीं हो सका है।अखिलेश ने चुनाव के बाद संगठन से शिवपाल के लोगों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। पार्टी अब पूरी तरह से अखिलेशमय है।विधानसभा चुनाव में हार के बाद से ही सार्वजनिक रूप से शिवपाल कहते रहे हैं, कि पार्टी की कमान मुलायम सिंह यादव को देनी चाहिए, लेकिन अखिलेश ने साफ कह दिया है कि वो पार्टी के अध्यक्ष हैं और रहेंगे। पार्टी की कमान किसी को नहीं देंगे।

अखिलेश पर दबाव बनाने के लिए उन्होंने अलग पार्टी बनाने का राग भी अलापा। पर अखिलेश के इरादे में कोई बदलाव नहीं आया। इसके बाद खबर आई कि शिवपाल बीजेपी में जा सकते हैं। इस पर भी अखिलेश खामोशी अख्तियार किए रहे। शिवपाल को उम्मीद है कि मुलायम के सहारे वो अपनी राजनीतिक नैया पार लगा लेंगे। इसीलिए वक्त बे वक्त कहते रहते हैं कि समाजवादियों को वो एकजुट करके सेक्युलर मोर्चा बनाएंगे, जिसके अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव होंगे।

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