नीतीश की पलटूदास पॉलिटिक्स

जिस तेज़ी से बिहार में नीतीश कुमार राजद से अलग हुए, जिस तेज़ी से भाजपा ने उनको समर्थन देने की घोषणा की और जिस गति से बिहार के राज्यपाल ने एनडीए सरकार का शपथग्रहण कराया उससे आमलोगों के मन में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी बीमार थे, अस्पताल में भर्ती थे, फिर भी 26 जुलाई की रात में ही उन्होंने नीतीश की ताजपोशी का समय मुकर्रर कर दिया। कुल मिलाकर ऐसा लग रहा है जैसे पूरी सियासी पटकथा तैयार थी और लालू की राजनीति से डरे केंद्र ने जल्दी में पूरा कर्मकांड निपटा दिया। इस तरह नीतीश कुमार ने आयाराम-गयाराम सियासत को भी पीछे छोड़ दिया। 6 बजे शाम तक महागठबंधन की सरकार थी, लेकिन रात 9 बजे एनडीए की सरकार बिहार में बन गई। दुकान वही, दूकानदार वही केवल दुकान का बोर्ड बदल गया।

नीतीश की पलटूदास पॉलिटिक्स कोई नयी नहीं है। वह भाजपा के साथ भी ऐसा कर चुके हैं। अपनी निष्कंटक सत्ता के लिए वो कभी भी पलट सकते हैं। लालू ने कहा भी कि यही नीतीश कुमार थे, जिन्होंने बिहार के लोगों से कहा था कि मर जाऊंगा पर भाजपा के साथ नहीं जाऊंगा। लेकिन इस पलटूदास ने बिहार के उन वोटरों का अपमान किया, जिन्होंने भाजपा की आंधी के खिलाफ लालू-नीतीश-कांग्रेस के गठबंधन को सपोर्ट किया था। 20 माह पहले हुए चुनाव में बिहार के वोटरों का जनादेश एकदम स्पष्ट था, दो तिहाई बहुमत से लोगों ने इन्हें जिताया था और भाजपा के विजय रथ के घोड़े को इसी बिहार ने रोका था। ऐसे में बिहार के करोड़ों लोग ठगे हुए महसूस कर रहे हैं। जिसका असर अगले चुनाव में दिख सकता है।

दरअसल नीतीश कुमार बिहार की राजनीति में अपने को अपरिहार्य समझ रहे हैं। उनके चाटुकारों तथा सलाहकारों ने उन्हें समझा दिया है कि उनकी साफ़-सुथरी छवि के आगे किसी की नहीं चलेगी। वो जैसा चाहेंगे, बिहार उनके साथ चलेगा, पर इससे बड़ा सियासी मुगालता हो नहीं सकता। जाति और धर्म की अतिरंजित इसी बिहारी राजनीति ने उन्हें लोकसभा चुनावों में धूल चटा दिया था।

आज नीतीश कुमार फिर से राजद और लालू परिवार को भ्रष्ट बता रहे हैं, उनका दम लालू कुनवे के साथ घुट रहा था। पर लालू का भर्ष्टाचार तो तब भी था नीतीश जी, जब जीतन राम मांझी के सवाल पर आप उनका समर्थन मांगने गये थे। यह वैचारिक ढोंग है। सवाल लालू और तेजस्वी के भ्रष्टाचार से बड़ा है। सवाल आपकी पलटूदास पॉलिटिक्स का है। आपको किसी कीमत पर सत्ता चाहिए, जैसा पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने कभी कहा था।

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