बड़े राजनीतिक संकट में घिर रहे नीतीश कुमार

क्या बिहार में किसी सियासी तूफ़ान के आने की आशंका है! क्या बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विधानपरिषद् सदस्यता जानेवाली है! देश की शीर्ष अदालत इस मामले पर सुनवाई कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने सीएम नीतीश के खिलाफ सुनवाई करते हुए राज्य चुनाव आयोग को नोटिस भेजा है। नोटिस का जवाब मिलने के बाद इस सिलसिले में आगे की सुनवाई हुई। अगर चुनाव आयोग ने नीतीश कुमार को दोषी माना तो इनकी विधान परिषद् सदस्यता भी जा सकती है। हालाँकि अभी इस मामले में सुनवाई शुरू ही हुई है। दो सप्ताह के अंदर आयोग अपनी रिपोर्ट भेजेगा।

सीएम नीतीश की विधान परिषद की सदस्यता खत्म करने की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को नोटिस भेजा है और दो हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि नीतीश कुमार ने अपने चुनावी दस्तावेजों में उनके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज होने की जानकारी नहीं दी। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने आज इस पर मामले की सुनवाई की।

कई चर्चित मामलों को सामने लानेवाले अधिवक्ता एमएल शर्मा ने नीतीश के खिलाफ आपराधिक मामले की याचिका दायर की है। उन्होंने मांग की है कि बिहार के मुख्यमंत्री को विधान पार्षद पद से अयोग्य घोषित कर देना चाहिए क्योंकि उन्होंने 2004 और 2012 में चुनावी दस्तावेज जमा कराते समय आपराधिक जानकारी छुपाई।

याचिका में दावा किया गया है कि नीतीश ने अपने कार्यकाल की संवैधानिक ताकत के चलते 1991 के बाद से ही गैर जमानती अपराध में जमानत तक नहीं ली और साथ ही 17 साल बाद मामले में पुलिस से क्लोजर रिपोर्ट भी फाइल करवा ली। सीएम नीतीश कुमार के खिलाफ जांच का आदेश देने की मांग भी याचिका में की गई है।

अधिवक्ता ने याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह इस तरह का आदेश जारी करे कि अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर या आपराधिक मामला दर्ज है तो वह किसी भी संवैधानिक पद पर ना बैठ पाए।

जुलाई में जिस दिन नीतीश कुमार ने महागठबंधन से नाता तोडकर बीजेपी के साथ गठबंधन कर लिया था, उसी दिन लालू प्रसाद ने कांग्रेस नेता की हत्या के इस मामले को लेकर नीतीश पर हमला बोला था।

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