बालू पर नीतीश सरकार का यू टर्न

बुधवार को बिहार सरकार बालू के सवाल पर बैकफुट पर आ गई. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण बैठक में यह तय किया गया कि हाईकोर्ट के निर्णय के आलोक में बालू के मामले में पुरानी व्यवस्था ही जारी रहेगी. 23 जनवरी को पटना हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई होनी है.

बैठक के बाद मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने बताया कि बालू के मामले में पुरानी व्यवस्था ही जारी रहेगी. सरकार बालू की कीमतों का निर्धारण नहीं करेगी, बल्कि बाजार खुद पहले की तरह बालू की कीमतें तय करेगा. मुख्य सचिव ने कहा कि 20 दिनों के अंदर बालू की सप्लाई नियमित हो जाने की उम्मीद है.

इस बीच 21 को राजद ने बालू और गिट्टी के सवाल पर बिहार बंद का आह्वान किया है. बालू के सवाल पर जिस तरह पूरा बिहार उबल रहा था, उसके हिसाब से राजद ने बालू सियासत में बाजी मार लिया.

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर सरकार को पुराने आदेश को ही लागू करना था तो इतना विलंब क्यों किया गया. जानकार बताते हैं कि मुख्यमंत्री को विभाग के अफसरों ने अंधेरे में रखा. जब स्थिति बद से बदतर हो गई और लोगों का उबाल सड़क पर आ गया, तब सरकार को स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगा.

हालांकि राजद के वरिष्ठ नेता रामबदन राय इस तथ्य से इनकार करते हैं. वह कहते हैं कि हाई कोर्ट की लगातार अवमानना हो रही थी और ऐसे में 23 दिसंबर को पटना उच्च न्यायालय इस मामले में जिम्मेदारों को दंडित करने का आदेश सुना सकता था. जिससे बचने के लिए सरकार बैकफुट पर आई है और हाई कोर्ट के आदेश को लागू करने की बात कह रही है.

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