आदिवासी सेंगेल महारैली के जरिये झारखंड में नया मोर्चा

दलित-मुस्लिम-आदिवासी गठबंधन बनाने की नयी कोशिश

भाजपा से तकरीबन नाराज़ झारखंड की आदिवासी राजनीति को आज सालखन मुर्मू ने वामसेफ के दलित तथा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अल्पसंख्यक वोट बैंक से जोड़ने का संकेत दिया | रांची में आयोजित आदिवासी सेंगेल महा रैली में भीड़ भी खूब जुटी | रांची को जाम करती हुई मोरहाबादी मैदान में जुटी भीड़ ने वामसेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेश्राम और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौजाना सज्जाद नोमानी के साथ प्रदेश में नए सियासी गठजोड़ पर मुहर भी लगाई |

वामसेफ के अध्यक्ष ने कहा कि ‘अब व्यवस्था परिवर्तन का समय आ गया है| देश में पांच प्रमुख पार्टियां कांग्रेस, भाजपा, सीपीआईएम, सीपीएम तथा तृणमूल कांग्रेस ब्राह्मणवादी पार्टियां हैं। इनसे बहुजन समाज आदिवासी, दलित, पिछड़े और मुस्लिमों का भला होने वाला नहीं है।
वामन मेश्राम ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व झारखंड के सीएम रघुवर दास निर्वाचित नहीं नॉमिनेटेड हैं। एक को नॉमिनेट आरएसएस ने किया जबकि दूसरे को दिल्ली ने। इसलिए रघुवर दास से झारखंडी कोई उम्मीद कैसे रख सकते हैं। क्योंकि उनकी भक्ति दिल्ली के प्रति होगी न कि जनता के प्रति। छत्तीसगढ़ का व्यक्ति झारखंड का सीएम कैसे हो सकता है। इसलिए संविधान में प्रावधान करके यहां का सीएम किसी आदिवासी को बनाने का कानून बनना चाहिए।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना सज्जाद नोमानी ने कहा कि झारखंड में पक्ष और विपक्ष के बीच सब फिक्स है | उन्होंने झारखंड के मुस्लिमों से आह्वान किया कि जुल्म मत सहो और जुल्म मत करो। समाज को जालिमों से बचाना भी मुस्लिमों का कर्तव्य है। जो ऐसा नहीं करता है, वह सात बार भी नमाज पढ़ ले कोई फायदा होने वाला नहीं है।

अभियान के संयोजनक सालखन मुर्मू ने कहा कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की तरह झारखंड में भी तीसरा विकल्प दिया जाएगा। झारखंड में पक्ष और विपक्ष के बीच मैच फिक्स हो चुका है। इससे आदिवासी, मूलवासी, दलित, पिछड़े और मुस्लिमों का भला होने वाला नहीं। उन्होंने कहा- झारखंड की बर्बादी के लिए भाजपा, झामुमो और आजसू पार्टी जिम्मेवार है। तीन से चार महीने में ऐसा आन्दोलन खड़ा करना है कि सरकार भूमि अधिग्रहण बिल और धर्मांतरण बिल को वापस ले ले। झारखंड के तमाम 28 आदिवासी एमएलए का उनके क्षेत्र में जबरदस्त विरोध होगा |

पूर्व सांसद सालखन मुर्मू ने सियासत की नयी विसात तो अच्छी बिछाई है लेकिन वामसेफ झारखंड में सक्रिय नहीं है तथा अल्पसंख्यकों के बीच कई बड़े स्थानीय चेहरे हैं जो उन्हें सूट करते हैं | सालखन मुर्मू दर्जनों राजनीतिक प्रयोग कर चुके हैं, ऐसे में उनका नया दांव कितना प्रभावी होगा, यह देखना अभी शेष है |

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