दबे-कुचलों को मुख्यधारा में लाना ही मेरा मकसद: राजू

राजनीति में हर दौर में युवाओं का अपना खास योगदान रहा है, उन्होंने देश में सियासत को नई दिशा दी है। उनके आंदोलनों और संघर्ष की कई कहानियां हैं। जिसने देश की राजनीति को बदल कर रख दिया है। आज के दौर में भी इन युवाओं ने देश और राज्य की राजनीति को अपने सोच और जज्बे से काफी हद तक प्रभावित किया है। देश और समाज के लिए कुछ करने की उनकी चाहत ने राजनीति की परिभाषा बदल दी है। ऐसे ही कई चेहरे बिहार की राजनीति में अपनी बेबाक और जूझारू छवि की बदौलत अलग पहचान बनाई है। राजनीतिक विश्लेषकों की राय है कि आनेवाले दिनों में ये युवा बिहार की दशा और दिशा तय करेंगे। बिहार के राजनीति की पटकथा लिखेंगे, युवा पीढ़ी की प्रेरणास्त्रोत बनेंगे। आइए, बात करते हैं ऐसे ही कुछ युवा राजनीतिज्ञों से।
बिहार की सियासत के युवा चेहरे -4
राजू तिवारी ने प्रारंभिक शिक्षा गोरखपुर के बेसिक प्राइमरी पाठशाला सगोरा से हासिल की, उसके बाद उच्च शिक्षा गोरखपुर विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में एमए किया। पढ़ाई पूरा करने के बाद इन्होंने सहारा एयरलाइंस में लगभग ढाई वर्षों तक नौकरी की, उसके बाद सहारा की नौकरी से इस्तीफा दे दिया और 1999 से राजनीति में सक्रिय हो गए। राजनीति की शुरुआत इन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर की लगभग तीन वर्षों तक निर्दलीय राजनीतिक पारी खेलने के बाद श्री तिवारी ने 2002 में लोक जनशक्ति पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। आठ वर्षों तक पार्टी में सक्रिय रहने के बाद पार्टी ने इन्हें सबसे पहले 2010 में मोतीहारी के गोविंदगंज विधानसभा से उम्मीदवार बनाया इस चुनाव में इन्हें पराजय का सामना करना पड़ा।
बता दें कि राजू तिवारी गोविंदगंज के पूर्व बाहुबली विधायक राजन तिवारी के बड़े भाई हैं। लोजपा ने इन्हें दोबारा 2015 के विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाया और इस बार क्षेत्र की जनता ने इन्हें रिकॉर्ड मतों से जिताया। श्री तिवारी का मानना है कि क्षेत्र की जनता ने जिस अपेक्षा के साथ मुझे अपना जनप्रतिनिधि चुना है मुझे उनकी उम्मीदों पर खरा उतरना है। परंपरावादी राजनेताओं से अलग सोच रखनेवाले इस युवा विधायक का मानना है कि आज समाज में अशांति और कलह का एक मात्र कारण है आर्थिक समस्या और बेरोजगारी। इसलिए समाज के हर तबके के बेरोजगार युवाओं को उसके शिक्षा और हुनर के अनुसार उसे रोजगार उपलब्ध कराना इनकी प्राथमिकता में शामिल है। अगर बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध हो जाता है तो परिवार और समाज से स्वत: कलह समाप्त हो जायेगा। इन्हें राजनीति में अपने छोटे भाई के राजनीतिक छवि का भरपूर फायदा मिला जिसके चलते ही इन्हें लोजपा से 2010 और 2015 में टिकट मिला और 2015 में गोविंदगंज क्षेत्र के विधायक निर्वाचित हुए।
परिवार के सामाजिक कार्यों को देखते हुए क्षेत्र की जनता ने इनकी माता को वर्ष 2006 से लगातार वर्तमान तक अरेराज प्रखंड का निर्विरोध प्रखंड प्रमुख बनाया है। एक एयरलाइंस कंपनी में कार्य करने वाले इस युवा राजनेता के मन में सामाजिक सेवा का भाव इस तरह जागृत हुआ की अपनी शानो शौकत की नौकरी को त्याग कर गांव समाज के लिए कुछ करने की सोची।
इसके बाद सार्वजनिक जीवन में आने का फैसला किया। सार्वजनिक जीवन में आने के बाद इनका एक ही ध्येय है कि कैसे सरकार द्वारा प्रदत सुविधाओं का समुचित लाभ आमजन को उपलब्ध कराया जाय। समाज के दबे-कुचले वर्ग के लोगों के लिए शिक्षा,स्वास्थ्य,बिजली और सड़क की सुविधा उपलब्ध कराना इनकी प्राथमिकता में शामिल है। भविष्य की योजनाओं की चर्चा करते हुए कहते हैं कि जिस सामाजिक सोच और विकास को लेकर राजनीति में आया हूं उसे पूरा करना ही समाजिक सेवा और राजनीति में आने का एकमात्र उद्देश्य है।

 

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *