मुफ्त में हंसिये और टनाटन रहिये

-संजय सिंह-

लालू बोले-इ बाबा रामदेव का दवाई है
लालू यादव आज टेंशन में नहीं लग रहे थे। लोग उन्हें घेर रखे थे और वे कुछ ऐसा-वैसा बोल रहे थे, जिससे लोग लगातार हंसे जा रहे थे। मुझे देख बोले-इ बाबा रामदेव का दवाई है। फ्री में हंसिये और टनाटन रिहये। मैं भी हंसा और लालू के साथ अपने इंटरव्यू को आगे बढ़ाने के लिए मौका देखने लगा। वे समझ गये। कहा-हमेशा हड़बड़ी में रहते हो। आराम से बइठते हैं, बातचीत भी होगी और साथ में पेट पूजा भी करते रहेंगे। कुछ देर बाद वह मौका मिला। ऑफ दी रिकॉर्ड की शर्त के साथ मैं शुरू हो गया।

सवाल : आज आप मूड में दीख रहे हैं, कोई विशेष बात है क्या?
जवाब : वैसा कुछ नहीं है, बाकी हमरा जगह अब सुशासन बाबू (नीतीश कुमार) टेंशन में हैं। हमको और राबड़ी को 15 साल तक गिरयाया और अब देखो सुशासन में पटना का जल और मल एके में मिल गया है। हाईकोर्ट जब बोला कि पटना कूड़े के ढेर पर है, तो उसका मंत्री कोर्ट को ही अटपट बोलने लगा। नीतीश अब अकबकी में मंत्री को समझा रहे हैं कि कोर्ट को नहीं बोला जाता है खाली सुना जाता है।

सवाल : वाइफ से टेंशन के बारे में खुल कर नहीं बताये?
जवाब : देखो भाई हम तो सब के बारे में सोचते हैं। शुरुआत घरे से करते हैं। राबड़ी को चौका बर्तन छुड़वाकर मुख्यमंत्री बनवाया। उनका दो गो भाई को विधायक सांसद बनवाया। का नहीं किया। विरोधी सब का-का नहीं बोला, बाकी हम टस से मस नहीं हुए। अपने गांव से ससुराल को रेल लाइन से जोड़ा। केतना गिनाये। अब राबड़ी हड़बड़ी में हैं कि साहब फिर से सीएम की कुर्सी जल्दी जोगाडिये। यही टेंशन है।

सवाल : इसके लिए क्या कर रहे हैं?
जवाब : हड़बड़ाने से कुछो मिलता है? हमहूं तो पीएम बनना चाहते हैं, तो उसके लिए राह-रस्ता न बनाना पड़ता है। रामिवलास को धीरे-धीरे पोटिया रहे हैं। अभी एक मंच पर उठना-बैठना शुरू हुआ है। नीतीश के खिलाफ मोर्चा खोलना है। पुराना लोग को फिर से जोड़ना है। उसके बाद हल्ला बोलेंगे।

सवाल : लेकिन रामिवलास तो अकेले चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं?
जवाब : अकेला चना भाड़ नहीं फोरता, यह उनको समझ में आ गया है। पोलिटक्स है, आदमी कुछो-कुछो बोलता रहता है। ज्यादा ध्यान देने पर इहो कवनो कम टेंशन नहीं देता।

सवाल : नीतीश भी तो कभी आपके साथ थे?
जवाब : हां, थे न। जब देखा कि यहां सीएम बनने का चांस नहीं है, तो अटपट बोल मूड़ीकटवा पार्टीवाला के साथ हो लिये। बुढ़ऊ जार्ज को भी पट्टी पढ़ाकर अपना खेमा में कर लिया। अब देखो उनको कइसे दूध के माछी की तरह बाहर फेंक दिया है।

सवाल : रामिवलास ने भी तो आपके चाणक्य प्रोफेसर रंजन यादव को तोड़ लिया था।
जवाब : गये तो वहां, बाकी का हैशियत रहा। हमरा साथ थे तो राज भोग रहे थे। वहां जाते कौड़ी के तीन हो गये।

सवाल : यह आपके साथ क्या हो रहा है कि जिसे भी आप चाणक्य का दर्जा देते हैं, वह आपको ही पट्टी पढ़ाने लगता है?
जवाब : हम इशारा समझ गये। बाबा शिवानंद तिवारी को जहां चाभने के लिए मिलता है, वहां वे पसर जाते हैं। माउथ डायिरया की शिकायत पढ़ने के समय से उनको है। अटर-पटर बोल के समझते हैं कि बड़का नेता हो गये। अरे ऊ तो हम कुछ पुराना करजा उतार रहे थे, नहीं तो वे साथ में रखने लायक हैं का। अब नीतीश को पट्टी पढ़ा रहे हैं। उनको भी जल्दीये गिरयायेंगे। बस तेल और तेल की धार देखते चलो।

सवाल :
वे तो कहते हैं कि आपका भांडा फोड़ेंगे?
जवाब : कहते हैं, कर नहीं न रहे हैं। वे जानते हैं कि हम पॉलिटिशियन खाली नहीं हैं। बुखार उतार देंगे। वे जानते हैं कि भंडा फोड़ने के नाम पर अंट-शंट गढ़ेंगे, तो हम उनका कॉलेज से लेकर अब तक का कच्चा चिट्ठा खोल देंगे। फिर लाजे उ न तो घरे जायेंगे ना पटना में नजर आयेंगे। हिरद्वारे में ठिकाना मिलेगा।

सवाल :
ऐसा क्या कच्चा चिट्ठा है आपके पास?
जवाब : नहीं, इ हम ऑफ दी रिकॉर्ड नहीं बोलेंगे। बात का बतंगड़ बन जाता है।

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