लाल किला डालमिया को, यही है केंद्र की उपलब्धि : मांझी

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा सेकुलर के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने केंद्र सरकार के 4 साल में किए गए दावों को जनता की आँखों में धूल झोंकने वाला बताया है.मांझी ने पूछा है कि केंद्र सरकार ने किसानों को उपज का लागत मूल्य समर्थन मूल्य 50% देने का वादा किया था पर किसानों को लागत मूल्य अभी तक नहीं दिया. उलटे सरकार विदेशों से अनाज मंगा रही है.

मोदी सरकार पर हमला करते हुए मांझी ने कहा कि आज प्रत्येक 24 घंटे में 35 किसान आत्महत्या कर रहे हैं. किसानों के नाम पर फसल बीमा निजी कंपनियों को दिया गया है, जिससे कंपनी पैसा कमा रही है और किसान बीमा से महरूम है. बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना पर सवाल उठाते हुए मांझी ने कहा कि 15 वर्ष तक बेटियों के हित में 6.5 करोड़ रुपए खर्च का लक्ष्य रखा गया था, पर बेटियों के लिए 5 पैसे प्रति बच्ची खर्च एक मजाक किया जा रहा है. जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन योजना में एक लाख करोड़ खर्च करना था, उक्त योजना का नाम अमृत और स्मार्ट सिटी के नाम पर 77640 करोड़ का लक्ष्य था पर 4 साल में 263 करोड़ ही खर्च कर सकी केंद्र सरकार. राजीव गांधी आवास योजना का नाम हाउसिंग फॉर ऑल कर दिया और वादा के मुताबिक दो करोड़ का लक्ष्य था पर 4 वर्ष में 33000 मात्र किया जो 3 प्रतिशत होता है.

बेरोजगारी पर मोदी सरकार को घेरते हुए मांझी ने कहा कि 2 करोड़ युवाओं को रोजगार प्रतिवर्ष देने का वादा किया था, पर मात्र 4.16 लाख प्रति वर्ष रोजगार दिया जा रहा है. शिक्षा सेस के नाम पर सरकार ने 160786 करोड़ वसूला है. इसका कोई हिसाब नहीं उल्टे ugc का बजट 67.5 प्रतिशत कम कर दिया गया है. मांझी ने मोदी से सवाल पूछा कि विजय माल्या, नीरव मोदी आदि भगोड़े के माध्यम से देश का पैसा बाहर भेजा गया है, वह कब वापस आएगा! लाल किला जैसी ऐतिहासिक इमारत का रखरखाव सरकार नहीं कर पाई, और उसे डालमिया को देना पड़ा. क्या केंद्र सरकार अपनी ऐतिहासिक धरोहरों का भी रखरखाव नहीं कर सकती.

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