बदल गए बिहार के राजपूत और ब्राह्मण चेहरे

मोदी केबिनेट के फेरबदल में बिहार से दो मंत्री बनाये गए हैं। ब्राह्मण नेता अश्विनी चौबे और पूर्व नौकरशाह आरके सिंह। छपरा के सांसद रूडी की जगह आरा के सांसद आरके सिंह ने ले ली है। इसी आरके सिंह ने पिछले चुनाव के वक़्त सुशील मोदी पर पैसे लेकर टिकट बांटने और भाजपा को हराने के गंभीर आरोप लगाये थे। इसी तरह भागलपुर के कई बार विधायक रहे अश्विनी चौबे भी सुशील मोदी से तनातनी के चलते ही भागलपुर से आरा भेज दिए गए थे। संयोग था कि मोदी लहर में आरके और चौबे दोनों जीत गए। तबसे ये लोग राजनीतिक वनवास ही झेल रहे थे।

अब जब सुशील मोदी फिर से सत्ता पर काबिज हैं तब इनके राजनीतिक विरोधियों का पुनर्वास कर अमित शाह ने साफ़ संकेत दे दिया है कि बिहार भाजपा में टीम शाह चलेगा, टीम सुशील मोदी नहीं। अश्विनी चौबे भाजपा के मुखर नेता रहे हैं, उन्हें लम्बा प्रशासनिक अनुभव रहा है, विद्यार्थी परिषद् का उनका बेकग्राउंड है। बिहार में बड़े कद के ब्राह्मण नेता हैं। इनसे भाजपा को 2019 में मदद ही मिलेगी।

आरके सिंह की छवि जुझारू और तेज़ तर्रार नौकरशाह की रही है। मधेपुरा के आरके सिंह राजपूत नेता आनंद मोहन के मजबूत विकल्प हो सकते हैं। आनंद मोहन जेल में आजीवन कारावास की सज़ा काट रहे हैं और अभी बिहार में राजपूतों को गोलबंद करने वाला कोई बड़ा नेता नहीं है, राधामोहन सिंह अपने इलाके में ही सिमटे हैं। राजीव प्रताप रूडी बेहद मिलनसार हैं, उनके व्यक्तित्व में कड़ापन नहीं है, कदाचित इसलिए उनको बाहर का रास्ता मोदी और शाह की जोड़ी ने दिखा दिया।

बहरहाल बिहार के दोनों नए चेहरे, 2019 की उम्मीद बनकर उभरेंगे, ऐसी उम्मीद भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व को है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अगले चुनाव तक बिहार में कैसी सियासी गोलबंदी होती है।

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *