मोदी कैबिनेट का विस्तार इसी सप्ताह संभव!

नरेंद्र मोदी सरकार की कैबिनेट में फेरबदल और विस्तार होने की प्रबल संभावना है। सूत्रों के मुताबिक यह विस्तार इसी हफ्ते संभव है। इसमें भाजपा के कुछ मंत्रियों की अपने पद से छुट्टी भी हो सकती है। माना जा रहा है कि इस विस्तार में जेडीयू और एआईएडीएमके नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। गौरतलब है कि हाल ही में नीतीश कुमार की जेडीयू ने फिर से भाजपा के साथ नाता जोड़ते हुए एनडीए में शामिल होने की घोषणा की है।

भाजपा एनडीए का नेतृत्वकर्ता दल है। सूत्रों का यह भी कहना है कि इस विस्तार में दो-दो मंत्री जेडीयू और एआईएडीएमके से बनाए जा सकते हैं। चूंकि सोमवार को एआईएडीएमके के दोनों गुटों के विलय के बाद इस बात की प्रबल संभावना है कि एआईएडीएमके एनडीए में शामिल हो। इसके पीछे प्रमुख कारण तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम का भाजपा के साथ पहले से ही तालमेल बताया जा रहा है। एआईएडीएम के पास लोकसभा में कुल 37 सीटें हैं जबकि राज्यसभा में पार्टी के पास 13 सीटें हैं। एम थंबीदुरई जिन्हें पार्टी के भीतर दो गुटों को साथ लाने में अहम माना जाता है को कैबिनेट मंत्री बनने की संभावना है।

भाजपा सूत्रों की मानें तो दक्षिण अभियान के जरिए भाजपा अगले 2019 के चुनाव में 120 लोकसभा सीटें हासिल करने पर जोर दे रही है। लिहाजा इस समीकरण को ध्यान में रखते हुए यह कैबिनेट विस्तार किया जाएगा। दूसरी ओर आंध्र प्रदेश में भाजपा के पास विधानसभा में सिर्फ 4.13 फीसदी वोट और सिर्फ 2 लोकसभा सीट हैं, लेकिन पार्टी अपनी सहयोगी तेदेपा के साथ खुद की स्थिति को भी मजबूत करना चाहती है। माना जा रहा है कि शोभा करांडल्जे जो उडुपी से भाजपा सांसद हैं को भी मंत्रालय में जगह मिल सकती है, उन्हें कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष येदियुरप्पा का करीबी माना जाता है।

यह विस्तार इसलिए भी जरूरी हो गया है क्योंकि मनोहर पर्रिकर के वापस गोवा जाने के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली रक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं और वेंकैया नायडू के उपराष्ट्रपति चुने जाने के बाद उनके दो मंत्रालयों शहरी विकास व सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का अतिरिक्त बोझ अन्य मंत्री उठा रहे हैं। जबकि उनके पास पहले से ही भारी भरकम मंत्रालय की जिम्मेदारी है।

सिर्फ जेटली ही नहीं बल्कि स्मृति ईरानी, रविशंकर प्रसाद, नरेंद्र सिंह तोमर, अनंत कुमार जैसे मंत्री एक साथ दो-दो मंत्रालयों का जिम्मा संभाल रहे हैं। चर्चा ये भी लगाए जा रहे हैं कि कुछ मंत्रियों को मंत्रालय से छुट्टी देकर उन्हें पार्टी संगठन के काम में भी लाया जा सकता है जिससे वह आने वाले चुनाव में पार्टी को मजबूत कर सकें।

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