ब्रांड मोदी ने पलट दी गुजरात की बाजी!

गुजरात में आखिरी चरण के मतदान के बाद आई विभिन्न चैनलों के एक्ज़िट पोल ने गुजरात में बीजेपी की स्पष्ट जीत का अनुमान लगाया है. बीजेपी को 99 से 113 सीटें मिल सकती है, जबकि 22 साल बाद वापसी की उम्मीदों पर कांग्रेस को बड़ा झटका लग सकता है. कांग्रेस को 68 से 82 सीटें ही मिल सकती हैं. कांग्रेस की सीटों में हार्दिक पटेल के पाटीदार आंदोलन संगठन, जिग्नेश मेवाणी और भारतीय ट्राइबल पार्टी भी शामिल हैं. अन्य के खाते में एक से चार सीटें आ सकती हैं. गुजरात में बहुमत के लिए 92 सीटों की ज़रूरत होती है.

हालांकि एक्ज़िट पोल्स सिर्फ गुजरात के चुनावी मूड के बारे में कुछ संकेत जरूर देते हैं. सटीक तौर पर गुजरात के बारे में 18 दिसंबर को नतीजों को देखने पर ही कहा जा सकता है. लेकिन इंडिया-टुडे और एक्सिस माई इंडिया ने अपने एक्ज़िट पोल से जो अनुमान लगाया है उसके मुताबिक बीजेपी को गुजरात में 47 फीसदी वोट मिल सकता है. 5 फीसदी वोट से कांग्रेस बीजेपी से पिछड़ सकती है. कांग्रेस को 42 फीसदी वोट मिलने का अनुमान है. अन्य के खाते में 11 फीसदी वोट जा सकते हैं. 2012 के चुनाव में कांग्रेस को 39 फीसदी वोट मिले थे, यानी कांग्रेस के लिए यहां से सिर्फ 3 फीसदी वोट बढ़ा पाने का अनुमान है. बीजेपी को 2012 में 48 फीसदी वोट मिले थे, जिससे बीजेपी को एक फीसदी वोट के नुकसान का अनुमान है. ऐसा लगता है एक तरह से गुजरात में 22 साल की सत्ता के बाद नाराज़गी को बीजेपी ने अपने खिलाफ नहीं जाने दिया है और कांग्रेस इसे अपने पक्ष में लाने में नाकाम दिख रही है.

सभी एक्ज़िट पोल्स के अनुमान ये कह रहे हैं कि बीजेपी को गुजरात में हराना मुश्किल है. भले ही कांग्रेस और राहुल गांधी ने पूरा ज़ोर लगा लिया. हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवाणी जैसे युवा नेताओं के सहारे गुस्से को कांग्रेस ने अपने पक्ष में करने की पूरी कोशिश की. भले ही गुजरात में सत्ता विरोधी माहौल की बात कही जा रही थी. लेकिन कम से कम एक्ज़िट पोल्स के अनुमान से तो यही लग रहा है कि नरेंद्र मोदी के नाम के आगे ऐसा लगता है कि गुजरात सबको भूल जाता है. हम आपको जल्दी जल्दी सभी एक्ज़िट पोल्स के अनुमान बता देते हैं.

दरअसल गुजरात में प्रचार के आखिरी 16 दिन में जिस तरह से नरेंद्र मोदी ने बीजेपी का मोर्चा संभाला. क्या एक्ज़िट पोल्स के आए नतीजे ये संकेत दे रहे हैं कि गुजरात में ब्रांड मोदी ने ही बाज़ी पलट दी, जिसको राहुल गांधी अपने आक्रामक कैंपेन से चुनौती दे रहे थे. लेकिन गुजरात में ब्रांड मोदी को धराशायी करना नामुमकिन दिख रहा है. हालांकि इसकी जमीन विपक्ष ने ही तैयार कर दी जिससे बीजेपी को कांग्रेस पर हावी होने का मौका मिल गया.

सौराष्ट्र-कच्छ के इलाके में नाराज़गी को बीजेपी ने चुनावी नुकसान बनने नहीं दिया. दक्षिण गुजरात में व्यापारियों की नाराज़गी को कांग्रेस अपने पक्ष में नहीं कर सकी.जातिगत समीकरण साधने की कोशिश भी कांग्रेस की फेल होती दिख रही है.पाटीदारों को बड़े पैमाने पर कांग्रेस के साथ लाने में हार्दिक पटेल फेल दिख रहे हैं. ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर, दलित नेता जिग्नेश मेवाणी भी फेल दिख रहे हैं.उत्तर और मध्य गुजरात के इलाके में मोदी के आक्रामक कैंपेन से पूरी तस्वीर बदल दी. इसके साथ ही मणिशंकर अय्यर के नीच वाले बयान को मोदी ने कांग्रेस के लिए नुकसान वाला बना दिया.

गुजरात किसी और के लिए महत्वपूर्ण हो ना हो, कांग्रेस या राहुल गांधी के लिए ज़रूरी हो ना हो. लेकिन मोदी पॉलिटिक्स के लिए इससे ज़रूरी दूसरा कुछ भी नहीं हो सकता. ये पीएम मोदी के राजनैतिक सुरक्षा कवच की तरह भी है इसलिए नरेंद्र मोदी ने आखिर तक पूरी ताकत लगा दी.27 नवंबर से पीएम मोदी ने गुजरात में बीजेपी के कैंपेन का मोर्चा संभाल लिया. करीब 34 जगह रैलियां कीं, 28 हज़ार किलो मीटर की दूरी तय की. आखिरी 5 दिन में अय्यर के नीच शब्द को गुजरात और देश के अपमान का मुद्दा बनाया. प्रचार के आखिरी दिन राजनैतिक विरोधियों को विकास का सी प्लेन दिखा दिया.

अगर एक्ज़िट पोल्स के नतीजे और अनुमान सही हैं और 18 दिसंबर को भी कुछ ऐसा ही हो सकता है तो फिर इसका एक ही मतलब है कि ब्रांड मोदी ने गुजरात में चमक खोई नहीं, बल्कि वो गुजरात के बाद कहीं ज़्यादा मजबूत हो जाएगा.

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