ये हैं राधामोहन सिंह, बाढ़ में खड़े

राकेश कुमार

बिहार में बाढ़ का कहर नया नहीं है। ये बात अब पुरानी हो गई। सीमांचल पिछले कई दशकों से ये त्रासदी झेलने को विवश है। कई योजनाएं बनीं पर लोगों को राहत नहीं मिली। केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह क्षेत्र का दौरा किया। पर क्या लोगों के घर उजड़ने से रूकेंगे। ये बड़ा सवाल है।

नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के कारण नेपाली नदियां पूरे उफान पर हैं। सीमांचल में कोसी, कमला गंडक और बागमती के अलावा नेपाल से निकली तमाम छोटी नदियां इस समय विकराल रूप धारण किए हुए हैं। पूर्वी चंपारण के ढाका स्थित गुवाबारी में लाल बकेया का तटबंध टूटने से दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। देवापुर के पास लालबकेया एवं बागमती नदी में कहीं कोई अंतर नहीं दिख रहा है। दोनों नदियां विकराल रूप धारण कर चुकी हैं और इनका पानी पताही प्रखंड के कई गांवों में फैल गया है। पताही के जिहुली गांव में कई घर बाढ़ के पानी में ध्वस्त हो गए हैं। गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नदी के दोनों ओर गोपालगंज एवं पूर्वी चंपारण में तटबंध पर दबाव बना हुआ है। मुजफ्फरपुर-नरकटियागंज रेलखंड से गुजरनेवाली तमाम दूरगामी रेलगाड़ियों का मार्ग परिवर्तित कर दिया गया है।

पूर्वी चंपारण में बाढ की स्थिति भयावह

पूर्वी चंपारण जिले में लालबकेया एवं तियर नदी पूरे उफान पर है। गुवाबारी में तटबंध टूटने के कारण इसका पानी तेजी से पताही प्रखंड के कई गांवों से लेकर ढाका प्रखंड में फैल गया है। उधर रामगढ़वा में तिलावे का पानी कई गांवों में फैल गया है। आदापुर प्रखंड भी बाढ़ के पानी से घिर चुका है। रक्सौल के कई गांवों में बाढ़ के पानी के प्रवेश की सूचना है। तियर नदी का पानी मोतिहारी, बंजरिया एवं छौड़ादानों के कई गांवों में प्रवेश कर गया है। कल देर रात के बाद से मोतिहारी के आसपास के इलाकों में गई है। गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। शाम में बाल्मीकिनगर बराज से चार लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण प्रशासन पूरी तरह अलर्ट हो गया है। यह पानी गंडक के दोनों तटबंध पर भारी दबाव बना सकता है। पू्र्वी चंपारण में 8 जगहों पर गंडक का कमजोर प्वाइंट चिह्नित किया गया है, जहां प्रशासन पूरी तरह चैकस होकर नजर रखे हुए है। पानी बढ़ने पर पटना-अरेराज-बेतिया पथ पर वाहनों का आवागमन ठप हो सकता है।

जिले के विभिन्न प्रखंडो से नदियों की उफान की खबर आ रही है मूलतः चंपारण का पूरा इलाका ,नेपाल की तिलावे, बंगरी, बालगंगा, तीयर ,दुधौरा धनौती सहित पचास से ज्यादा नदियो के घिरे होने के साथ ही गंडक,बूढी गंडक,बागमती, लालबकेया से घिरी है। वही इसके किनारे बडी आबादी रहती है। बताते चलें कि नीति एवं नीयत में खोट के कारण गंडक, बागमती परियोजनाओं ने दम तोड़ दिया, महज बांध तो बना लेकिन जल प्रवाह का उचित मार्ग नहीं बनाया गया, जिस कारण पिछले कई सालों से वर्षा न होने के बावजूद इस साल नेपाल के जल ग्रहण इलाके में हुए भारी वर्षा ने सभी नदियों में उफान ला दिया है जिस कारण कई इलाकों से तटबंधों के टूटने की खबर आ रही है।

गुरूवार से मोतिहारी शहर के कई हिस्सों में पानी फैल गया जो विकराल रूप लेता जा रहा है। शुक्रवार को गोपालपुर, नकछेद टोला, राधानगर, चांदमारी, आजादनगर, भवानीपुर जीरात, खोदानगर, मठिया जिरात, जानपुल चैक, अवधेश चैक सहित कई मुहल्लों में पानी ने तबाही मचानी शुरू कर दी है।

केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने शुक्रवार को पूर्वी चंपारण के केसरिया एवं संग्रामपुर प्रखंडों के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। बाढ़ की कहर झेल रहे तथा चंपारण तटबंध पर शरण लिए बाढ़ पीड़ितों से मिलकर श्री सिंह ने सरकार की ओर से चलाये जा रहे राहत कार्यों की जानकारी ली।

उन्होंने सीओ को राहत कैंपो की व्यवस्था में सुधार करने का निर्देश दिया। मौके पर मौजूद केसरिया के सीओ नरेन्द्र कुमार से बाढ़ राहत कार्यों की बिंदुवार जानकारी ली। बाढ़ प्रभावितों के बीच लगाये गये मेडिकल कैंप के बारे में उन्होंने पीएचसी केसरिया के प्रभारी डा. परमेश्वर ओझा से पुछताछ किया। भाजपा जिलाध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता को श्री सिंह ने बाढ़ प्रभावित बच्चों के बीच बिस्किट का वितरण करने को कहा। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि बहुत जल्द वे अपनी ओर से बाढ़ पीड़ित परिवार के दुधमुंहे बच्चों के लिए डिब्बा बंद दूध का वितरण करायेंगे।

केसरिया के ढेकहा स्थित चंपारण तटबंध पर शरण लिए बाढ़ पीड़ितों के बीच मंत्री श्री सिंह ने कहा कि प्रत्येक बाढ़ पीड़ित परिवारों को सरकार की ओर से नौ हजार रुपये दिए जायेंगे। यह राशि बाढ़ पीड़ितों के खाते में सरकार भेजेगी ताकि उसका सीधा लाभ पीड़ित परिवारों को मिल सके। उन्होंने कहा कि भोजन मद में छह हजार और कपड़ा खरीदने के लिए तीन हजार रुपये दिये जायेंगे। स्थानीय प्रशासन की उपस्थिति में केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि जब तक नौ हजार की राशि बाढ़ पीड़ितों के खाते में नहीं आ जाती तब तक बाढ़ राहत शिविरों के माध्यम से प्रभावित परिवारों को तैयार भोजन मिलता रहेगा। पीपराकोठी प्रखंड की दक्षिणी ढेकहां पंचायत के हथियाही चकरदेय गांव में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। लगातार जलस्तर में वृद्धि हो रही है। चार दशक के बाद लोगों ने इतनी भयावह बाढ़ को देख लोग दहशत में हैं। गांव से लोगों का पलायन शुरू हो गया।

मेहसी के कई गांवों में घुसा बाढ़ का पानी
मेहसी में बूढ़ी गंडक नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो रही है। बाढ़ का पानी रंगरेज छपरा, सराय बनवारी, रामपुरवा, उझिलपुर, इब्राहिमपुर, सेमरा, चकनगरी, लक्ष्मीनिया, कटहां, डेरवा, भीमलपुर आदि गांवों के के सरहे में प्रवेश कर चुका है। जलस्तर में हो रही वृद्धि के कारण उपरोक्त इलाको में बाढ़ का कहर बरपने लगा है। अंचलाधिकारी रणधीर प्रसाद ने बताया कि अभी स्थिति नियंत्रण में है। लेकिन भयावह है। जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। बांध तक पानी का प्रवेश हो चुका है। लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

पहाड़पुर में स्थिति में सुधार

पहाड़पुर प्रखंड क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित इलाके से पानी लगातार घट रहा है। गुरुवार को अंचल अधिकारी अवधेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि मंझरिया के सात व आठ वार्ड में पानी था। वहां से पानी कम होने लगा है। खतरे की कोई बात नहीं है।

बनकटवा में जलस्तर में हो रही कमी
बनकटवा प्रखंड की कुल दस पंचायतों में से सात पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हैं।जिन पंचायतों में बाढ़ का कहर बरपा है, उनमें पकड़िया और इनरवा फुलवार पंचायत पूर्ण रूप से बाढ़ प्रभावित है। आंशिक रूप से प्रभावित पंचायतों में जीतपुर, बनकटवा,बीजबनी पूर्वी, बीजबनी उत्तरी तथा निमोइया पूर्वी शामिल हैं। अंचलाधिकारी आनंद कुमार गुप्ता ने बताया कि फिलहाल गांव में घुसे पानी का स्तर गिरा है।

पकड़ीदयाल में बाढ की स्थिति बिगडी, सड़क संपर्क टूटा
पकड़ीदयाल प्रखंड में गुरुवार को बाढ़ की स्थिति खराब हो गई है। इलाके के कई सड़कें ध्वस्त हो गई हैं। प्रखंड की थरबिटिया व सिसहनी पंचायत में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। यहां के मझौलिया, सिसहनी और भगवानपुर गांव में सूखा राहत सामग्री नहीं पहुंचने से बाढ़ पीड़ित परिवारों में प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों के प्रति आक्रोश है। बीडीओ शशिकांत प्रसाद एवं सीओ रविश कुमार ने बताया कि थरबिटिया पंचायत के कैंप प्रभारी बीईओ बिदा राम एवं जन प्रतिनिधि के सहयोग से सूखा राहत सामग्री का लगभग पांच सौ पैकेट वितरित किया गया है। मझौलिया के लिए राहत सामग्री भेजी जा रही है। पकड़ीदयाल ढाका पथ पर रमपुरवा के पास पानी का दबाव अभी भी बना हुआ है।

घट रहा अरेराज में गंडक का जलस्तर
अरेराज में गंडक के जलस्तर में आई कमी को देखते ही अनुमंडल क्षेत्र के संग्रामपुर व अरेराज प्रखंड के गंडक तटवर्ती गांवो के बाढ़ पीड़ितों में घर वापसी की उम्मीद दिखने लगी है। तीन दिनों से बाढ़ की तबाही झेल रहे दर्जनों गांव के लोगों के चेहरों पर गुरुवार को कुछ मुस्कान व उम्मीद देखने को मिली। क्योंकि करीब एक से डेढ़ फीट पानी उतरा है। दर्जनों गांव के लोग ऊंचे स्थान, चंपारण तटबंध व एसएच-74 पर शरण लिए हैं। एसडीएम विजय कुमार पाण्डेय ने बताया कि गुरुवार को एनडीआरएफ की टीम के साथ सखवा टोक गांव का निरीक्षण किया। साथ ही वहां फंसे लोगों को एनडीआरएफ की टीम की मदद से चंपारण तटबंध पर राहत शिविर में पहुचाया गया। अरेराज प्रखंड के नवादा ढाला, नवादा पंचायत भवन, व गो¨वदगंज ढाला के पास राहत शिविर चलाया जा रहा है। वहीं राजकीय मध्य विद्यालय चटिया बड़हरवा, मध्य विद्यालय चटिया, व नगदाहा चंपारण तटबंध पर राहत शिविर में पीड़ितों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई है। पूर्वी चम्पारण के 27 प्रखण्डों में से 20 प्रखण्ड पूरी तरह से बाढ से प्रभावित हैं। लगभग 800 गांव बाढ से प्रभावित हैं और तकरीबन एक लाख लोग बेघर हो गये हैं।

बताते चलें कि आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, राज्य के 17 जिलों के 156 प्रखंडों की 1.08 करोड़ से ज्यादा की आबादी बाढ़ से प्रभावित है। बाढ़ की चपेट में आने से मरने वालों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। राज्य में गुरुवार को बाढ़ से मरने वालों की संख्या 119 से बढ़कर शुक्रवार को 153 तक पहुंच गई। अररिया में सबसे ज्यादा 30 लोगों की मौत हुई है, जबकि किशनगंज में 11, पूर्णिया में नौ, कटिहार में सात, पूर्वी चंपारण में 11, पश्चिमी चंपारण में 23, दरभंगा में चार, मधुबनी में आठ, सीतामढ़ी में 13, शिवहर में तीन, सुपौल में 11, मधेपुरा में नौ, गोपालगंज व सहरसा में चार-चार, मुजफ्फरपुर में एक, खगड़िया में तीन तथा सारण में दो व्यक्ति की मौत हुई है।

बाढ़ प्रभावित इलाकों से पानी से घिरे 4.64 लाख लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इसके अलावा इन क्षेत्रों में 1,289 राहत शिविर खोले गए हैं, जिसमें करीब 3.92 लाख लोग शरण लिए हुए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अधिकारियों से बाढ़ से प्रभावित परिवारों को समय पर राहत देने को कहा है। साथ ही कुछ और नए इलाकों में खाने के पैकेट गिराने के आदेश दिए हैं। शुक्रवार को पटना में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बाढ़ से संबंधित समीक्षा बैठक में नीतीश ने कई और महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने शुक्रवार की रात तक किशनगंज से अररिया होते हुए बहादुरगंज जाने वाली सड़क को रि-स्टोर करने का निर्देश पथ निर्माण विभाग को दिया। उन्होंने कहा कि इस सड़क के बनने से बाढ़ राहत व बचाव कार्य युद्धस्तर पर किया जा सकेगा। इस काम के लिए बर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन की सहायता लेने को भी कहा है, जिससे क्षतिग्रस्त सड़कों, पुल-पुलियों की मरम्मत में आसानी हो।

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *