मंत्री ने मुख्य सचिव को चारा घोटाले में घेरा

कैबिनेट मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता सरयू राय ने पत्र लिख कर मुख्यमंत्री रघुवर दास से मुख्य सचिव राजबाला वर्मा के चारा घोटाले में संलिप्तता को लेकर स्पष्टीकरण देने को कहा है। उन्होंने कहा है कि गत 23 दिसंबर को सीबीआई न्यायालय ने पशुपालन घोटाला के एक मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद को दोषी क़रार देते हुए वहां के तत्कालीन उपायुक्त को भी स्पष्टीकरण देने के लिये कहा है। कहा है कि चाईबासा कोषागार से की गई कपटपूर्ण अवैध निकासी के संबंध में वहां के तत्कालीन उपायुक्त राजबाला वर्मा पर अनुशासनिक कारवाई चलाने के लिये कहा गया है।

सीबीआई द्वारा झारखंड सरकार को लिखे पत्र में कहा गया है कि राजबाला वर्मा 30.04.1990 से 30.04.1991 तक चाईबासा की उपायुक्त थीं। इस दौरान उनके द्वारा कोषागार का निरीक्षण नहीं करने, कोषागार से हो रहे व्यय की मासिक विवरणी महालेखाकार को नहीं भेजने और कोषागार के कार्यकलापों पर निगरानी नहीं रखने के कारण चाईबासा कोषागार से ग़लत निकासी हुई है। इसलिए इन पर सरकार द्वारा उपयुक्त अनुशासनिक कारवाई की जानी चाहिये।

श्री राय ने कहा कि सीबीआई प्रतिवेदन के आधार पर अनुशासनिक कारवाई चलाने के लिये झारखंड सरकार के विभिन्न मुख्य सचिवों ने 15 बार पत्र लिखे पर मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने इसका जवाब नहीं दिया। इसलिए पशुपालन घोटाला में उन पर लगे आरोपों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कारवाई करने एवं अग्रेतर जांच कर उपयुक्त कारवाई करने की प्रक्रिया लंबे समय से रुकी हुई है।

यह जांच का विषय है कि घोटाला के एक चर्चित मामले में बार- बार स्मारित किये जाने के बावजूद संबंधित आरोपी अधिकारी ने स्पष्टीकरण क्यों नहीं दिया और बार- बार पत्र देकर स्पष्टीकरण की प्रतीक्षा करते रहने के बदले सक्षम प्राधिकार द्वारा इनके विरूद्ध कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई? इस बारे में ज़िम्मेदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। अन्यथा राज्य में स्वच्छ एवं पारदर्शी प्रशासन के हमारे दावे पर सवालिया निशान खड़ा होगा और राज्य की छवि पर प्रतिकुल प्रभाव पड़ेगा।

उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस संबंध में मुख्य सचिव राजबाला वर्मा को निर्देश दें कि वे राज्य के पूर्ववर्ती मुख्य सचिवों द्वारा पर पशुपालन घोटाला में चाईबासा ट्रेज़री से हुई कपटपूर्ण निकासी के संदर्भ में समय-समय पर पूछे गये स्पष्टीकरण का शीघ्र जवाब दें ताकि समय सीमा के भीतर इस मामले का विधि सम्मत निष्पादन हो सके और क़ानून एवं सुशासन के मर्यादा की रक्षा की जा सके। इसके साथ ही उन्होंने राज्य प्रशासन के सक्षम पदाधिकारियों द्वारा मांगे गये स्पष्टीकरण का समय पर जवाब क्यों नहीं दिया।

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