मायावती के इनकार से लालू की मुहिम को बड़ा झटका

-मायावती का लालू की रैली में जाने से इनकार

राजद की “बीजेपी हटाओ-देश बचाओ” रैली को 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी एकता को मजबूती मिलने के तौर पर देखा जा रहा है। मगर, जैसे-जैसे चुनाव का वक्त नजदीक आ रहा है, बीजेपी के विरोधी दलों की इस उम्मीद को झटका लगता जा रहा है। हाल ही में जेडीयू ने आरजेडी-कांग्रेस से महागठबंधन तोड़कर एनडीए का दामन थाम लिया। नीतीश का बीजेपी में जाना विपक्षी फ्रंट के लिए बड़ा झटका साबित हुआ है तो वहीं दूसरी तरफ, यूपी में समाजवादी पार्टी की पारिवारिक कलह चुनाव के बाद तक बदस्तूर जारी है। ऐसे में मायावती का आरजेडी की रैली में न जाना बीजेपी के खिलाफ लामबंदी को और कमजोर करने जैसा है। हालांकि अभी तक उनके रैली में नहीं आने की वजह सामने नहीं आई है।

केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ जब-जब विपक्ष की एकता की बात होती है, तब-तब कुछ ऐसा होता है, जिससे ये एकता बिखर जाती है। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले क्षेत्रीय पार्टियों ही नहीं गठबंधन को भी हर रोज नए झटके लग रहे हैं।

आरजेडी 27 अगस्त को पटना में “बीजेपी हटाओ-देश बचाओ” रैली आयोजित करने वाली है। इसमें आरजेडी ने देश के ज्यादातर गैर एनडीए वाली पार्टियों को रैली में शामिल होने के लिए निमंत्रण भेजा था। लालू को उम्मीद थी कि उनकी रैली में पहली बार सपा और बसपा एक मंच पर नजर आएंगे। देश की मौजूदा सियासत में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने की लगातार कोशिश की जा रही है। इसके लिए लालू यादव लगातार कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी ये उम्मीद अब कमजोर होती जा रही है।

बिहार में शरद यादव के जदयू के खिलाफ बोलने और लालू को उनका सपोर्ट करने को लेकर विपक्षी एकता और रैली के बाद इसके लिए होने वाली गठबंधन की चर्चा जोरों पर है। ऐसी संभावना है कि 27 अगस्त की लालू की रैली में एकजुटता देखने को मिले। इसे लेकर राजद में उत्साह देखा जा रहा है। लालू प्रसाद यादव ने 27 अगस्त को पटना में तमाम विपक्षी पार्टियों के नेताओं को बुलाया है। जिसमें कांग्रेस, एसपी, बीएसपी, टीएमसी सहित कई राजनीतिक दल के नेताओं के शामिल होने की चर्चा है।

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