झगड़ रहे समाजवादी, काम कर रही बहन जी

यूपी में एक तरफ समाजवादी चाचा- भतीजा झगड़ रहे हैं वहीँ लगातार तीन चुनावों में मिली हार के बाद अब बसपा सुप्रीमो मायावती एक बार फिर अपनी सियासी जमीन को वापस पाने की तैयारी में जुट गई हैं। इसके लिए वे रैली के जरिए कार्यकर्ताओं से संवाद कर रही है, उनमें जोश भर रही हैं। यही वजह है कि पुराने दिग्गजों की गैर मौजूदगी के बावजूद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आयोजित रैली में बसपाइयों की भीड़ उमड़ पड़ी।

यही नहीं बसपा प्रमुख अब जनसभाओं और रैलियों के जरिए विरोधियों को जवाब भी देने की रणनीति पर भी काम कर रही हैं। इसी क्रम में उन्होंने मेरठ, मुरादाबाद और सहारनपुर मंडल को सम्मलित कर मेरठ में महारैली की। कुल मिलाकर वे अभी से ही लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट गई हैं।राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद वे एक बार फिर सक्रिय हो गई हैं। वे प्रदेश में पार्टी को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि इस दौरान पार्टी के तमाम दिग्गज नेता उनसे किनारा कर चुके हैं। इनमें कई ने भाजपा का दामन थाम लिया है जबकि कुछ दूसरी पार्टी में जाने की तैयारी कर रहे हैं।

लोकसभा चुनाव में अपनी ताकत दिखाने के लिए मायावती अभी से सियासी जमीन को मजबूत करने और बिखरे जनाधार कोजोड़ने की कोशिश कर रही हैं। पिछले दिनों मेरठ में हुई बसपा की महारैली से मायावती ने इसकी शुरुआत कर दी है। यहां समर्थकों की भीड़ देखकर वे खुश नजर आईं। इसकी मुख्य वजह यह है कि इसके पहले मायावती की मेरठ में अभी तक जितनी भी बड़ी रैलियां हुई थीं, वे उन बड़े बसपा नेताओं की देखरेख में हुई थी। ऐसे में रैली में भारी संख्या में लोगों का पहुंचना बसपा के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है।

जाहिर है मेरठ रैली से बसपा को संजीवनी मिली है और मायावती इसे भुनाने में पीछे नहीं रहेगी। यही नहीं इस रैली के जरिए उन्होंने विरोधियों को भी मुंहतोड़ जवाब दिया जो बसपा के जनाधार के खत्म होने का दावा कर रहे थे। 18 सितम्बर को मेरठ में रैली के बाद मायावती दिवाली बाद 24 अक्टूबर से यूपी समेत पूरे देश में ताबड़तोड़ रैलियां करेंगी।अक्टूबर से मई 2018 तक मायावती 13 रैलियां करेंगी, जिनमें से पांच रैली यूपी के अलग-अलग जिलों में होगी। पार्टी ने मायावती की रैलियों का खाका भी तैयार कर लिया है।

यूपी के अलावा मायावती देश के अन्य राज्यों में भी रैली करेंगी। इन रैलियों की भी रूपरेखातैयार की जा चुकी है। दरअसल मायवती कई बार कह चुकी हैं कि केंद्र सरकार 2018 में लोकसभा चुनाव करवा सकती है। लिहाजा इसको देखते हुए वे अभी से तैयारियों में जुट गईं हैं।

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