क्या नीतीश की नाव में फिर सवार होंगे मांझी!

पिछले दो-तीन दिनों में बिहार का सियासी माहौल अचानक गर्म हो गया है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हम पार्टी के नेता जीतन राम मांझी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मुलाकात सियासी गलियारों में खूब चर्चा में है। कहा जा रहा है कि मांझी- नीतीश की जुगलबंदी बहुत जल्द देखने को मिलेगी, इसकी पटकथा लिखी जा रही है।

सियासी हलकों में तो इस बात की भी विशेष चर्चा हो रही है कि गत बुधवार को जीतन राम मांझी सीएम नीतीश कुमार से उनके एक अणे मार्ग पर जब मिलने गए तो किसी पुरानी अम्बेसडर कार से गए थे, पर लौटते वक्त नई फॉर्च्यूनर पर सवार थे।

जानकारों की मानें तो नीतीश और मांझी के बीच ये बातचीत सीएम नीतीश के काफिले पर हुए हमले के तुरंत बाद होनेवाली थी पर किसी कारण ये टल गई, हालांकि मुलाकात में कैबिनेट के विस्तार और मांझी के पुत्र को इसमें एडजस्ट करने पर बात हुई है। वहीं इसके बाद सीएम की बुधवार शाम राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मुलाकात ने इस कयास को और बल दे दिया है कि जीतन राम मांझी एक बार फिर बिहार की राजनीति में कोई बड़ी भूमिका में लौट सकते हैं।

उधर राजद नेता तेजस्वी यादव ने मांझी को राजद खेमे में आने का न्योता दिया है। कहा है कि मांझी जब चाहें राजद में आ सकते हैं। तेजस्वी ने इसके साथ ही मांझी को सलाह भी दे दी है कि पार्टी में शामिल होने का फैसला वो सोच-विचार कर करें और इस बात का खास ख्याल रखें की कौन सी पार्टी ऐसी है जो उनके मान-सम्मान का ध्यान रखेगी।

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी ने कहा है कि जीतन राम मांझी हों या उपेंद्र कुशवाहा दोनों नेताओं का एनडीए में दम घुट रहा है इसलिए राजद का प्रयास है कि कांग्रेस के साथ को-आर्डिनेशन कमेटी बनाकर विपक्ष को धारदार बनाया जाय।

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