महिलाएं शिक्षित होंगी तभी मिलेगा आरक्षण का लाभः मांझी

हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (से.) के अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने कहा कि आज हमलोग भारतीय संस्कृति को भूल रहे हैं, और पश्चिमी सभ्यता को अपना रहे हैं। आजादी के 70 वर्षों के बाद भी महिलाओं को उनका अधिकार नहीं मिला है, उन पर अत्याचार हो रहे हैं। ये बातें उन्होंने अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर कही। उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार ने महिलाओं के लिए कई योजनाएं चलाईं, लेकिन कोई भी योजना महिलाओं के उत्थान में कारगर साबित नहीं हुईं। ये सब लूट-खसोट का धंधा है।

मांझी ने कहा कि जाति-धर्म से ऊपर उठ कर गरीबी दूर करने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि हम जातिवाद नहीं मानते, मेरा मकसद है सिर्फ गरीबी दूर करना है। हम महिलाओं, गरीबों की समस्याओं को दूर करने की बात करते हैं तो कुछ स्वार्थी लोग हमें पागल तक कहते हैं। लेकिन इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। हम गरीबों के हक के लिए हमेशा लड़ते रहेंगे। उन्होंने कहा कि संविधान में जनसंख्या के आधार पर आरक्षण देने की बात कही गयी है। लेकिन स्वार्थी लोग जनसंख्या की जनगणना में गड़बड़ी कर महिलाओं को आरक्षण का लाभ नहीं लेने देते हैं। उन्होंने कहा कि भीमराव अम्बडेकर ने कहा था कि जिसकी जितनी संख्या भारी उतनी हिस्सेदारी। उन्होंने कहा कि महिलाओं का 50 प्रतिशत आरक्षण देना केवल दिखावा है। संविधान में सुधार करने की जरूरत है। महिलाओं को आरक्षण का लाभ तभी होगा जब वे शिक्षित होंगी। मांझी ने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि शिक्षा में सुधार करने की बात ये लोग करते हैं, लेकिन सुधार नहीं कर पाते। सरकारी स्कूलों का स्तर काफी नीचे है। उसमें सुधार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सब को एक समान शिक्षा दिया जाना चाहिए। मांझी ने कहा नीतीश कुमार को चाहिए कि ऐसा कानून बनाये जिसमें सभी बड़े-बड़े अधिकारियों के बच्चे भी सरकारी स्कूल में पढ़ें तभी सरकारी स्कूलों कि स्थिति में सुधार होगा। मांझी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अपील की है कि राज्य में कॉमन स्कूल सिस्टम लागू करें। शिक्षा व्यवस्था कॉमन करें। उन्होंने कहा कि 3100 करोड़ शिक्षा का बजट है फिर भी शिक्षा का स्तर इतना खराब है। उन्होंने आरोप लगाया कि सारे पैसों का गबन कर दिया जाता है।

मांझी ने कहा कि बिहार सरकार गरीबों की झुग्गी-झोपड़ियों को उजाड़ देती है। नीतीश कुमार को पहले वैकल्पिक व्यवस्था करें तभी इन झोपड़ियों को हटाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब मैं मुख्यमंत्री था तब मुझे काम नहीं करने दिया गया। जब मैं काम करने लगा तो मुझे हटा दिया गया। मैंने लड़कियों को निःशुल्क शिक्षा दिए जाने की व्यवस्था की थी। महिलाओं का पेंशन 200 से बढ़ा कर 400 रुपया कर दिया था।

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