बीजेपी को रोकने के लिए ममता का सॉफ्ट हिंदुत्व कार्ड

पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के टारगेट पर है. इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित केंद्र के ज्यादातर मंत्री इस राज्य में लगातार अपने दौरे बढ़ा रहे हैं. केंद्र सरकार वह हर अवसर भुनाने में लगी है जिससे पश्चिम बंगाल में ममता का असर खत्म किया जाए. पार्टी के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद रखते हैं. ताकि किसी भी प्रकार की कोई संवादहीनता की स्थिति पैदा न हो.

इधर, लाल ब्रिगेड से मुकाबला करने के लिए ममता बनर्जी ने एक दौर में जिस बीजेपी की सहायता ली थी. आज उसी बीजेपी के राज्य में बढ़ते प्रभाव से वो बेचैन हैं. इसी के मद्देनजर ममता अपने सियासी समीकरण दुरुस्त करने में जुट गई हैं. देखा जाय तो ममता पर प्रो-मुस्लिम होने का आरोप लगता रहा है. अब ममता ने अपना पैंतरा बदलते हुए सॉफ्ट हिंदुत्व का भी फार्मूला अपनाया है. इस कड़ी में उनकी पार्टी ने पहले राज्य में सभी ग्रामीण परिवारों को गाय बांटने का ऐलान किया था. इसके बाद सोमवार को ममता बनर्जी ने कलकत्ता से दो सौ किमी दूर बीरभूमि में ब्राह्मण सम्मेलन किया.

बंगाल की सियासत में बीजेपी अपनी जड़ें जमाने के लिए पुरजोर कोशिश कर रही है. 2014 लोकसभा चुनाव के बाद से लगातार उसका ग्रॉफ राज्य में बढ़ा है. बीजेपी शुरू से ही ममता बनर्जी को मुस्लिम परस्त के तौर पर पेश करती रही है और आने वाले चुनाव में इस छवि को भुनाने की कोशिश में है. ममता को अब लेफ्ट से कहीं ज्यादा बीजेपी का डर सताने लगा है. इसीलिए ममता ने उससे पहले ही ब्राह्मण सम्मेलन के जरिए अपना सियासी दांव चला है.

टीएमसी के ब्राह्मण सम्मेलन की पीछे ममता बनर्जी का सियासी सोच छिपा हुआ है. पश्चिम बंगाल के राजनीतिक समीकरण को देखें तो करीब 70.54 फीसदी हिंदू मतदाता हैं और 28 फीसदी के करीब मुस्लिम आबादी है. बंगाल में ब्राह्मण आबादी महज 3 फीसदी है, लेकिन राज्य की राजनीति में उनका सबसे बड़ा दखल है. लेफ्ट से लेकर कांग्रेस और तृलमूल कांग्रेस में ब्राह्मणों का दबदबा है.

बीजेपी ममता को मुस्लिम परस्ती के आरोप लगाकर राज्य के हिंदु वोटरों को अपने पक्ष में एकजुट करना चाहती है. बीजेपी बंगाल में असम वाले फॉर्मूले को जरिये सियासी जंग फतह करने के जुगत में है. बीजेपी ने राज्य के 70 फीसदी हिंदू मतों को टारगेट करके अपनी रणनीति बनाई है. इसीलिए ममता को मुस्लिम चेहरे को तौर बीजेपी पेश करती रही है.

बीजेपी के सियासी गणित को ममता बनर्जी ने समझते हुए राज्य के दो बड़े समुदायों को एक साथ साधने की कोशिश कर रही हैं. इस कड़ी में ममता ने पहले तोहफे में गाय देने की बात कही और अब ब्राह्मण सम्मेलन के जरिए हिंदू समुदाय को संदेश देने की कोशिश की. ममता के सॉफ्ट हिंदुत्व की राह से बीजेपी में भी घबराहट है.

पश्चिम बंगाल में बीजेपी के प्रभारी और पार्टी राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा ' ममता जो कभी दुआ के लिए हाथ उठाती थी, वो अब अचानक बदल चुकी हैं. ब्राह्मणों के सम्मेलन का आयोजन कर रही है, गायों और गीता लोगों को बांट रही हैं. ये सब सिर्फ वोट पाने के लिए कर रही है. प्रदेश की जनता उनके दोहरे चरित्र से वाकिफ है.

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