नगर निकायों के जन प्रतिनिधियों के मानदेय पर विचार हो: पोद्दार

राज्य के विभिन्न नगर निकायों के जन प्रतिनिधियों के मानदेय में बढ़ोत्तरी के समर्थन में झारखंड के राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार आ गये हैं। उन्होंने सीएम रघुवर दास को पत्र लिखकर नगर निकायों के जन प्रतिनिधियों के मानदेय एवं सुविधाओं में वृद्धि का सुझाव दिया है। पत्र की प्रतिलिपि राज्य के नगर विकास मंत्री सीपी सिंह को भी दी गयी है। सीएम को भेजे गये पत्र में श्री पोद्दार ने कहा है कि झारखंड के नगर निकायों के विभिन्न पदों पर पदस्थापित, निर्वाचित जन प्रतिनिधियों का मानदेय सम्मानजनक नहीं है। उन्होंने कहा कि मेरी जानकारी के अनुसार नगर निगमों में महापौर को मानदेय के रूप में मात्र 14000 रुपये एवं पार्षदों को मात्र 7000 रुपये प्रतिमाह प्राप्त हो रहा है। इसके अलावा उन्हें किसी प्रकार का भत्ता, कार्यालय सचिव, निजी सचिव/लिपिक, दूरभाष, कंप्यूटर/लैपटॉप आदि सुविधाएं भी देय नहीं है।


महेश पोद्दार ने कहा है कि वर्ष 1988 से वर्ष 2008 तक झारखंड के नगर निकायों के चुनाव नहीं हुए थे। निर्वाचित नगर निकाय जन प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति के कारण इस अवधि में राज्य के नगर निकायों की प्रशासनिक व्यवस्था अधिकारियों के हाथों में रही है। इस अवधि में निर्वाचित जन प्रतिनिधियों के पक्ष में किसी नीतिगत फैसले की अपेक्षा तो संभव नहीं थी। लेकिन, 2008 के बाद से लगातार दो बार नगर निकायों के चुनाव हुए, निर्वाचित जन प्रतिनिधियों के हाथों में नगर निकायों की सत्ता तो आयी। लेकिन इन्हें सम्मानजनक मानदेय एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के बारे में अबतक नहीं सोचा गया है। महेश पोद्दार ने मुख्यमंत्री से यथाशीघ्र महापौर, उप महापौर, पार्षदों समेत नगर निकायों के सभी श्रेणी के जनप्रतिनिधियों के मानदेय में सम्मानजनक बढ़ोत्तरी करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया आरंभ करने के लिए विभागीय पदाधिकारियों को निर्देशित करने का आग्रह किया है। इसके अतिरिक्त उन्होंने सभी जन प्रतिनिधियों को स्मार्ट फ़ोन, टैबलेट आदि उपलब्ध कराने का निर्णय लेने का भी आग्रह किया है।

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