मानव तस्करी में लिप्त दलालों के ख़िलाफ़ हो कार्रवाई: पोद्दार

-राज्यसभा सांसद ने राज्यसभा में उठाया मानव तस्करी का मामला

राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने झारखंड के सुदूर वन्य एवं जनजातीय क्षेत्रों यथा, खूंटी, दुमका, सिमडेगा, गुमला, रांची, चाईबासा, लोहरदगा और पलामू से बड़े पैमाने पर हो रही मानव तस्करी पर चिंता जताई है। श्री पोद्दार ने तारांकित प्रश्न के माध्यम से राज्यसभा में यह मामला उठाया और इस घृणित कारोबार में लगे दलालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग रखी। इस मामले में गृह राज्यमंत्री हंसराज गंगाराम अहीर द्वारा लिखित उत्तर में सरकार ने स्वीकार किया है कि रोजगार दिलाने का झांसा देकर झारखण्ड की बालिकाओं के दुर्व्यापार से संबंधित शिकायतें समय-समय पर प्राप्त होती हैं। यह भी स्वीकार किया गया है कि ऐसे मामलों में दलालों की भूमिका होती है। झारखंड के कई जिलों ने ऐसे दलालों की सूची तैयार की हैं तथा झारखंड सरकार द्वारा निगरानी रखी जा रही है। हालांकि ऐसे दलालों की सूची केन्द्रीकृत रूप से नहीं रखी जाती है। श्री पोद्दार ने कहा कि ऐसे दलालों की सूची सार्वजनिक किये जाने की जरुरत है ताकि लोग इनसे सावधान रह सकें।

श्री पोद्दार ने कहा कि फिलहाल रोजगार के लिए झारखण्ड से अन्य प्रदेशों में जानेवाले युवकों–युवतियों के निबंधन का प्रावधान है। प्लेसमेंट एजेंसियों के निबंधन का भी प्रावधान है। लेकिन असली जरुरत झारखण्ड के युवकों–युवतियों को काम देनेवाले नियोक्ताओं के निबंधन की है ताकि हमारे बच्चों की नियोक्ताओं द्वारा प्रताड़ना की स्थिति में उन्हें पकड़ा जाना आसान हो। उन्होंने कहा कि निबंधित नियोक्ताओं की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध हो ताकि राज्य के लोगों को, रोजगार के लिए अन्य प्रदेशों में गए बच्चों के अभिभावकों को भी पता रहे कि उनके बच्चे कहां नियोजित हैं।

श्री पोद्दार को बताया गया कि ‘पुलिस’ तथा ‘लोक व्यवस्था’ भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत राज्य के विषय हैं। इसलिए, राज्य सरकारें कानून के मौजूदा प्रावधानों के अंतर्गत इस प्रकार के अपराधों से निपटने में सक्षम हैं। लेकिन श्री पोद्दार का मानना है कि ऐसे मामले अंतरराज्यीय अपराधों की श्रेणी के हैं और ऐसे मामलों में भारत सरकार का मजबूत दखल, पहल आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वे झारखण्ड की इस गंभीर समस्या के समूल निराकरण के लिए भारत सरकार की प्रभावी भूमिका चाहते हैं और इसके लिए अलग से भारत सरकार को पत्र लिखेंगे, व्यक्तिगत स्तर पर प्रयास करेंगे।

श्री पोद्दार को यह भी बताया गया कि केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने मानव तस्करी के मामलों पर अंकुश लगाने के लिए मानव-दुर्व्यापार-रोधी इकाइयां स्थापित करने के लिए राज्यों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई है। गृह मंत्रालय समय-समय पर राज्यों की मानव-दुर्व्यापार-रोधी इकाइयों के नोडल अधिकारियों के साथ बैठकें भी करता है और इन्हें मानव-दुर्व्यापार के मामलों से निपटने के लिए मार्गदर्शन उपलब्ध कराता है।

गृह मंत्रालय महिला तथा बाल विकास मंत्रालय और श्रम और रोजगार मंत्रालय को ट्रैफिकिंग के पीड़ितों के पुनर्वास तथा राज्यों की ऐसी फर्जी प्लेसमेंट एजेंसियों पर नजर रखने की भी सलाह देता है जो रोजगार उपलब्ध कराने के नाम पर भोले-भाले पीड़ितों को धोखा देती हैं। गृह मंत्रालय ने रेल मंत्रालय से भी संपर्क किया है ताकि ट्रैफिकिंग के मकसद से रेलवे के माध्यम से ले जायी जा रही महिलाओं और बच्चों की किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर कड़ी नजर रखने के लिए जीआरपी और अन्य रेलवे स्टाफ को अलर्ट किया जाए।

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