मधु कोड़ा का बंध गया बोरा!

-कोयला घोटाला मामले में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा व पूर्व मुख्य सचिव एके बसु, कोयला सचिव एचसी गुप्ता समेत 8 दोषी करार

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा को कोयला घोटाला मामले में दोषी करार दे दिया गया है. दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में बुधवार को विशेष सीबीआई जज ने भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत कोड़ा समेत 8 लोगों को दोषी करार दिया. पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता और झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव एके बसु भी कोर्ट ने दोषी पाया है. सभी 8 लोगों की सजा का एलान गुरुवार को दोपहर 2:10 बजे के बाद होगा. सीबीआई की विशेष अदालत ने इन्हें भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम और आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी पाया है.

सीबीआई के विशेष जज भरत पराशर ने झारखंड के पूर्व सीएम मधु कोड़ा, उनके करीबी विजय जोशी, पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता, झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव एके बसु को वर्ष 2007 में झारखंड स्थित राजहरा नॉर्थ कोल ब्लॉक को कोलकाता के विनी आयरन एंड स्टील उद्योग लिमिटेड को आवंटित करने के लिए आपराधिक साजिश रचने का दोषी पाया. गुरुवार को दोपहर 2:15 बजे सभी दोषियों की सजा पर बहस होगी और उसके बाद इन्हें सजा सुनायी जायेगी.

मधु कोड़ा, एचसी गुप्ता और कोलकाता की कंपनी विनी आयरन एंड स्टील उद्योग लिमिटेड (VISUL) के अलावा झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव एके बसु, बसंत कुमार भट्टाचार्य, बिपिन बिहारी सिंह, वीआईएसयूएल के निदेशक वैभव तुलस्यान, मधु कोड़ा के कथित करीबी सहयोगी विजय जोशी और चार्टर्ड अकाउंटेंट नवीन कुमार तुलस्यान भी इस मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल हैं. इन पर आरोप है कि इन्होंने झारखंड में स्थित राजहरा नॉर्थ कोल ब्लॉक को विनी आयरन एंड स्टील उद्योग लिमिटेड को आवंटित करने में नियमों का पालन नहीं किया.

मुकदमे की सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कहा था कि कंपनी ने आठ जनवरी, 2007 को राजहरा नॉर्थ कोल ब्लॉक के आवंटन के लिए आवेदन किया. कोर्ट में लंबे अरसे तक चली सुनवाई में सीबीआई ने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार और इस्पात मंत्रालय ने वीआईएसयूएल को कोल ब्लॉक आवंटन करने की अनुमति नहीं दी थी. स्क्रीनिंग कमेटी ने आरोपित कंपनी को कोयला खदान आवंटित करने की सिफारिश की थी. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को गुप्ता ने किया गुमराह :सीबीआई ने यह भी कहा कि कमेटी के अध्यक्ष एचसी गुप्ता ने कोयला मंत्रालय का प्रभार भी देख रहे तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से कथित तौर पर इन तथ्यों को छुपाया कि झारखंड सरकार ने VISUL को कोयला खदान आवंटन करने की सिफारिश नहीं की थी.

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