कहीं किसानों की तरह व्यवसायी भी तो नहीं सिस्टम के शिकार!

हजारीबाग में मारवाड़ी समाज के एक ही परिवार के दो बच्चों सहित छह लोगों की हत्या की गई है या उन्होंने आत्महत्या की है, यह एक दिल दहलाने वाली घटना है, जिससे पूरा समाज स्तब्ध है। कैसे एक पूरा हंसता- खेलता परिवार खत्म हो गया। पुलिस का मानना है कि कर्ज में डूबे इस व्यापारी परिवार ने सामूहिक आत्महत्या की है। अगर पुलिस की बात सच है तो यह और भी ज्यादा भयावह तथ्य है।
इस आत्महत्या के बाद कई सवाल समाज में उठने लगे हैं, क्या पिछले कुछ दिनों से जिस प्रकार राज्य में किसान कर्ज के भंवरजाल में फंस कर आत्महत्या कर चुके हैं, उसी प्रकार अब व्यवसायियों की भी स्थिति तो नहीं हो गई है। क्या यह सरकार के सिस्टम में आई खामियों की वजह से हो रहा है। कई व्यवसायी यह कहते तो मिल जाते हैं कि सरकार ने जिस प्रकार की नीतियां पिछले 3-4 सालों में लायी हैं उससे छोटे व्यापारी काफी प्रभावित हुए हैं, उनके व्यवसाय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। नोटबंदी के तुरंत बाद जीएसटी लागू किए जाने से कई व्यवसायियों ने अपनी पीड़ा खुलेआम जाहिर की है कि उनका घाटा बढ़ता ही जा रहा है।
बहरहाल, हजारीबाग के महेश्वरी परिवार के हत्या या आत्महत्या का मसला जो भी रहा हो। यह तो जांच का विषय है जिसे देर-सबेर पुलिस सुलझाएगी। लेकिन यह भी तथ्य है कि ऐसे कई व्यवसायी हैं जो आर्थिक मंदी की मार झेल रहे हैं और जिसे सुलझाने में फिलहाल सरकार विफल दिखाई दे रही है।

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