संघ के तिरंगा प्लान से लेफ्ट की बढ़ी टेंशन

संघ और लेफ्ट तिरंगा फहराने को लेकर आमने-सामने हैं। एक-दूसरे पर तंज और छींटाकशी का दौर जारी है। केरल में अपनी सियासी जमीन मजबूत करने के उद्देश्य से बीजेपी और संघ लगातार कोशिश कर रहे हैं। माहौल को राष्ट्रवादी बनाने के प्रयास के तहत संघ प्रमुख मोहन भागवत एक बार फिर 26 जनवरी को झंडा फहराने की मुहिम में लगे हैं। इसलिए संघ और केरल की लेफ्ट सरकार के बीच एक बार फिर घमासान मचा है। मसला वही पुराना है। यानी तिरंगे से जुड़ा।

पिछली बार जहां 15 अगस्त पर तिरंगा फहराने पर विवाद हुआ था, वहीं इस बार गणतंत्र दिवस पर फिर से संघ प्रमुख भागवत के झंडारोहण के एलान के बाद रार मची है। वाम नेताओं ने कहा है कि जिन्होंने आजादी के बाद तिरंगे से प्यार नहीं किया, वे आज सियासी हित के खातिर फहराने चले हैं। भागवत 26 जनवरी को पलक्कड़ के एक स्कूल में तिरंगा फहराने की तैयारी में है। इसी स्कूल में वे संघ के तीन दिवसीय कैंप में भी शिरकत करेंगे। एक वरिष्ठ संघ पदाधिकारी का कहना है- ”सर संघचालक हमेशा स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस पर झंडा फहराते हैं, जहां मौजूद रहते हैं। चूंकि इस बार वे 26 जनवरी के मौके पर केरल में रहेंगे, इस नाते वहां तिरंगा फहराएंगे। लिहाजा इस पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए।” संघ कार्यकर्ता बताते हैं कि स्कूल में कार्यक्रम का आयोजन भारतीय विद्या निकेतन की ओर से हो रहा है।

संघ के स्टेट कोआर्डिनेटर केके बलराम का कहना है- "सर संघचालक की मौजूदगी में 26 जनवरी की सुबह झंडा फहराकर गणतंत्र दिवस मनाने का कार्यक्रम है, इसके लिए किसी की अनुमति की जरूरत नहीं है। क्योंकि कार्यक्रम का आयोजन संघ से संचालित स्कूल में हो रहा है न कि किसी सरकारी संस्थान में।" भागवत ने पिछली बार जब एक गवर्नमेंट एडेड स्कूल में तिरंगा फहराया था तो राज्य सरकार ने स्कूल के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश जारी किया था।

उधऱ सीपीएम नेता बृंदा करात भागवत के इस कार्यक्रम का विरोध किया है। उन्होंने कहा है कि- "विभिन्न अवसरों पर तिरंगा फहराने के लिए राज्य और केंद्र सरकारों की ओर से सरकुलर जारी कर नियम-कायदे तय किए गए हैं। संघ ने तो 1947 से तिरंगे को स्वीकार ही नहीं किया। ऐसे में राजनीतिक फायदे के लिए राष्ट्रीय प्रतीक का इस्तेमाल करना अनुचित है।"

गौरतलब है कि केरल में लंबे अरसे से राजनीतिक वर्चस्व के लिए सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया और संघ कार्यकर्ताओं के बीच खून-खराबे का खेल चल रहा है। संघ के जरिए भाजपा यहां अपने लिए रास्ता तलाशने में जुटी हुई है। पिछले साल अमित शाह ने भी संघ और भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा को मुद्दा बनाते हुए केरल में जनरक्षक यात्रा निकाली थी।

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